जानें, क्यो न्यूज पोर्टल्स PRB/PCI एक्ट के अंतर्गत नहीं आएंगे?

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ऑनलाइन न्‍यूज चैनलों-पोर्टल्‍स को लेकर MIB के पास नहीं हैं ये अधिकार

सूचना एवं प्रसारण राज्‍यमंत्री राज्‍यवर्धन सिंह राठौड़ का कहना है कि ऑनलाइन न्‍यूज चैनलों और पोर्टल्‍स को लाइसेंस जारी करने का मंत्रालय के पास अधिकार नहीं है। राठौड़ का कहना था कि सूचना तकनीक और इंटरनेट से जुड़े नीतिगत मामलों को इंफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी एक्‍ट 2000 द्वारा नियंत्रित किया जाता है और यह मिनिस्‍ट्री ऑफ इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एंड इंफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी (MeitY) के तहत आता है।

लोकसभा में एक सवाल के जवाब में राठौड़ ने यह भी बताया कि ऑनलाइन न्‍यूज चैनलों और पोर्टल्‍स के पंजीकरण और उन्‍हें लाइसेंस जारी करने को लेकर फिलहाल मंत्रालय के पास कोई कानून अथवा पॉलिसी नहीं है। राठ़ौड़ के अनुसार, ‘ओवर द टॉप (OTT) सेवाओं जैसे- हॉट स्‍टार, यू ट्यूब, नेटफ्लिक्‍स और अमेजॉन प्राइम विडियो को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) रेगुलेट नहीं करता है। हालांकि इन प्‍लेटफॉर्म्‍स पर प्रदर्शित कंटेंट के लिए आईटी एक्‍ट-2000 के तहत पर्याप्‍त सुरक्षा इंतजाम मौजूद हैं।’ उन्‍होंने बताया कि इंटरनेट पर ‘पेड स्‍ट्रीमिंग’ और ‘विडियो ऑन डिमांड सर्विस’ को भी एमआईबी रेगुलेट नहीं करता है।

इससे पहले दिसंबर में राठौड़ ने कहा था कि इंटरनेट पर पेड स्‍ट्रीमिंग और विडियो ऑन डिमांड सर्विस के तहत दिखाए जाने वाले कंटेंट के लिए मिनिस्‍ट्री ऑफ इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एंड इंफॉर्मेशन टेक्‍नोलॉजी (MeitY) के तहत गठित आईटी एक्‍ट-2000 में पर्याप्‍त सुरक्षा उपाय किए गए हैं। आईटी एक्‍ट-2000 के सेक्‍शन 69ए के तहत इन इनफॉर्मेशन/वेबसाइट्स/यूआरएल को ब्‍लॉक करने का अधिकार है।

सेक्‍शन 69 ए के तहत कुछ खास परिस्थितियों जैसे-भारत की रक्षा, भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्‍यों की सुरक्षा, विदेशी राज्‍यों से संबंध आदि के मामले में ही यूआरएल को ब्‍लॉक करने का अधिकार है। संबंधित जांच एजेंसियां वेब और सोशल मीडिया समेत इस तरह की गतिविधियों पर नजर रखती हैं और शिकायत सही मिलने पर उचित कदम उठाती हैं।
‘Frost and Sullivan’ रिपोर्ट का जिक्र करते हुए राठौड़ ने कहा कि देश में ओटीटी सबस्‍क्राइबर बेस 70 मिलियन तक पहुंच चुका हैं, जिनमें से 1.3 मिलियन पेड विडियो सबस्‍क्राइबर्स हैं।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) न्‍यूज पोर्टल्‍स को प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट (PRB Act) 1867 और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया एक्‍ट (Press Council of India) 1978 के तहत लाने नहीं जा रहा है। यह एक्ट सिर्फ प्रिंट मीडिया सेक्टर पर ही लागू होते हैं।

सूचना एवं प्रसारण राज्‍य मंत्री कर्नल राज्‍यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने ( 4 April 2018 ) संसद को बताया कि बिजनेस रूल्‍स एलोकेशन (Allocation) के तहत इलेक्‍ट्रोनिक एंड इनफोर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्‍ट्री (MEITY) को इनफोर्मेशन टेक्‍नोलॉजी एक्‍ट 2000 के तहत रखा गया है। इसके तहत डिजिटल न्यूज पेपर्स और न्यूज पोर्टल्‍स आते हैं।

राठौड़ का कहना है कि विभिन्‍न वेबसाइट्स पर केंद्र सरकार के ऐडवर्टाइजमेंट्स के लिए सरकार ने नई गाइडलाइंस तैयार की थीं। सरकारी विज्ञापनों को ऑनलाइन प्लेटफार्म (Google, Yahoo आदि) पर जारी करने के लिए ‘Directorate of Advertising and Visual Publicity’ (DAVP) की पॉलिसी को 24 मई 2016 से प्रभावी बना दिया गया है।

  • वेबसाइट्स पर विज्ञापनों के लिए उपयुक्त एजेंसी और कीमतों के लिए इस पॉलिसी के तहत ही कार्य किया जाता है। यह नई पॉलिसी DAVP की वेबसाइट पर उपलब्‍ध है।
  • पीआरबी एक्‍ट सिर्फ प्रिंटेड न्‍यूजपेपर्स पर लागू होता है न कि ऑनलाइन न्‍यूजपेपर्स पर। इसी प्रकार पीसीआई एक्‍ट भी प्रिंटेड न्‍यूजपेपर्स/जर्नल्‍स पर ही लागू होता है।

स्रोत – समाचार4मी‍डिया