Ministry Of Co-Operation: मोदी मंत्रिमंडल विस्तार से पहले केंद्र ने बनाया एक नया मंत्रालय

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के कैबिनेट का विस्तार बुधवार शाम को किया जाएगा. इससे ठीक पहले केंद्र सरकार ने एक नया मंत्रालय बनाया है. केंद्र सरकार ने मंगलवार देर शाम ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा एक अलग ‘सहयोग मंत्रालय’ बनाया गया है. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए एक नया सहकारी मंत्रालय सृजित करने का फैसला किया है. आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

मंत्रिपरिषद में बुधवार को बड़ा फेरबदल होने के बारे में चर्चा के बीच सरकारी सूत्रों ने कहा कि नया मंत्रालय सहकार से समृद्धि के विजन को साकार करने के लिए सृजित किया जा रहा है. सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए एक अलग प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत ढांचा उपलब्ध कराएगा. नये मंत्रालय के लिए एक प्रभारी मंत्री को बुधवार को नामित किया जाएगा.

सूत्रों ने बताया कि नया मंत्रालय सहकारिता को एक सच्चे, जमीनी स्तर तक पहुंचने वाले जन आधारित आंदोलन में तब्दील करेगा. मंत्रालय सहकारिता के लिए कारोबार को आसान बनाने के लिए प्रक्रिया को कारगर करेगा और बहु-राज्य सहकारिताओं के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा.

उधर, पीएम मोदी की नई कैबिनेट में शामिल होने को लेकर जिन लोगों के नाम की चर्चा हैं, उनमें कई नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ अन्य पहुंचने वाले हैं. इनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia), सर्बानंद सोनोवाल (Sarbananda Sonowal), पशुपति पारस, नारायण राणे और वरुण गांधी (Varun Gandhi), शांतनु ठाकुर, सुशील मोदी, राजीव रंजन, संतोष कुशवाहा, अनुप्रिया पटेल, प्रवीण निषाद मुख्य रूप से शामिल हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक कल करीब दो दर्जन से अधिक नए चेहरे को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी.

कैबिनेट विस्तार का एक बड़ा कारण ये भी है कि मोदी सरकार में कई मंत्री ऐसे हैं, जिनके पास एक से अधिक मंत्रालय हैं. पीयूष गोयल, हरदीप पुरी समेत कई ऐसे मंत्री हैं. ऐसे में अगर 20 से अधिक मंत्रियों को कैबिनेट विस्तार के जरिए मंत्रिमंडल में शामिल किया जाता है, तो अतिरिक्त प्रभार वाले मंत्रियों के काम का भार कुछ कम हो जाएगा.

मौजूदा मंत्रिपरिषद में थावरचंद गहलोत सहित कुल 53 मंत्री हैं और नियमानुसार अधिकतम मंत्रियों की संख्या 81 हो सकती है. मंत्रिपरिषद में विस्तार और फेरबदल की अटकलों को मंगलवार को तब और बल मिला जब केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया और उन नेताओं को फोन कर दिल्ली बुलाया गया जिन्हें मंत्री बनाए जाने की चर्चा पिछले कुछ दिनों से चल रही है.