भारत-चीन संयुक्त आर्थिक समूह की बैठक

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भारत-चीन संयुक्त आर्थिक समूह की नई दिल्‍ली में हुई अहम बैठक। केन्द्रीय वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने चीन में तिलहन, सोयाबीन, बासमती और गैर-बासमती चावल, फलों, सब्जियों और चीनी जैसे कृषि उत्पादों के लिए बाजार की उपलब्धता की मांग की। चीन के मंत्री झोंग शान ने चीन में भारतीय निवेश का स्वागत किया।

भारत, चीन के समक्ष भारी व्‍यापार असंतुलन का मुद्दा बार-बार उठाता रहा है। वह औषध और कृषि उत्‍पादों तथा सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में भारतीय निर्यात सुचारू बनाने के उपायों की भी मांग करता रहा है। इसी के मद्देनज़र भारत-चीन संयुक्त आर्थिक समूह की कल नई दिल्‍ली में अहम बैठक हुई।

बैठक में केन्द्रीय वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने चीन में तिलहन, सोयाबीन, बासमती और गैर-बासमती चावल, फलों, सब्जियों और चीनी जैसे कृषि उत्पादों के लिए बाजार की उपलब्धता की मांग की।

भारत ने दवाइयों और सूचना प्रोद्योगिकि सहित कई क्षेत्रों में भारतीय निर्यात सुचारू बनाने के उपायों की भी मांग की । चीन के मंत्री झोंग शान ने चीन में भारतीय निवेश का स्वागत किया और दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे की समस्या पर तवज्जो देने का वायदा किया।

भारत और चीन के बीच सोमवार को संयुक्त आर्थिक समूह की बैठक नई दिल्‍ली में सम्पन्न हुई । इस बैठक के एजेंडे में दोतरफा व्यापार एवं वाणिज्य को आगे बढ़ाने के तौर तरीकों के साथ ही व्यापार घाटे को कम करने की भारत की मांग शामिल है ।

बैठक में केन्द्रीय वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु और चीन के मंत्री ज़ौंग शॉन तथा दोनों देशों के वरिष्‍ठ अधिकारी शामिल हुए। भारत, चीन के साथ भारी व्‍यापार असंतुलन का मुद्दा बार-बार उठाता रहा है और सोमवार की बैठक में भारत ने पुरज़ोर तरीके से इस मुद्दे को उठाया ।

सुरेश प्रभु ने चीन में तिलहन, सोयाबीन, बासमती और गैर-बासमती चावल, फलों, सब्जियों और चीनी जैसे कृषि उत्पादों के लिए बाजार की उपलब्धता की मांग की। भारत ने दवाइयों और सूचना प्रोद्योगिकि सहित कई क्षेत्रों में भारतीय निर्यात सुचारू बनाने के उपायों की भी मांग की ।

चीन के मंत्री झोंग शान ने चीन में भारतीय निवेश का स्वागत किया और दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे की समस्या पर तवज्जो देने का वायदा किया। चीन ने कहा कि व्यापार संबंधों पर भारत के साथ स्पष्ट और प्रभावी बातचीत केवल दोनों देशों के बीच ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी ।

भारत-चीन संयुक्त आर्थिक समूह दोनों पड़ोसी देशों के बीच सबसे पुराना और अहम वार्ता तंत्र है। गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान अप्रैल से अक्टूबर में चीन के साथ व्यापार घाटा 36.73 अरब अमरीकी डॉलर पर रहा।