मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के स्पीकर को जारी किया नोटिस

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मद्रास हाईकोर्ट ने डीएमके ह्विप एम. चक्रपाणि की याचिका पर तमिलनाडु के स्पीकर को जारी किया नोटिस, याचिका में किया गया दावा, स्पीकर ने 18 फरवरी को विश्वास मत के दौरान सरकार के खिलाफ वोट करने के लिए ओपीएस धड़े के विधायकों को नहीं किया था अयोग्य घोषित। विधानसभा में विश्वास मत पर अदालत की रोक जारी।

तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत परीक्षण करने पर रोक जारी रहेगी । बुधवार को मद्रास हाई कोर्ट में इस मामले में सुनवाई हुई और अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी । अदालत ने मामले की सुनवाई सौमवार को करने का फैसला किया । अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी होने तक राज्य विधानसभा में विश्वास मत परीक्षण पर लगी रोक को बरकरार रखा है । साथ ही इन विधायकों को अयोग्य घोषित करने से हुई खाली सीटों पर उपचुनाव कराने पर भी रोक लगी रहेगी ।

तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष पी धनपाल ने एआईएडीएमके के 18 विधायकों को सदन के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था । ये सभी विधायक पार्टी से निष्कासित नेता टीटीवी दिनाकरण के समर्थक हैं । इन्ही विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी है और उन पर संवैधानिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाया है ।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में स्पीकर ने अपने लिखित जवाब में कहा कि ये 18 विधायक राज्य सरकार को गिराने की साजिश रच रहे थे, और उन्हें सदस्यता खत्म करने से पहले जवाब के लिए भरपूर वक्त दिया गया। इसके बावजूद भी केवल दो लोगों ने अपना पक्ष रखा। वहीं दिनाकरण कैम्प के वकील ने कहा कि विधायक मुख्यमंत्री के खिलाफ थे सरकार के नहीं।

वहीं अदालत ने एक दूसरे मामले में विधानसभा अध्यक्ष धनपाल को आदेश दिया कि वो फरवरी में हुए बहुमत परीक्षण के सिलसिले में 12 अक्टुबर तक जवाब दाखिल करे । इस मामले में डीएमके ने मांग की थी कि उन 12 विधायकों के खिलाफ कार्रवाई हो जिन्होंने बहुमत परीक्षण के वक्त मुख्यमंत्री ई पलानिस्वामी के खिलाफ वोट किया था, और उस वक्त ये विधायक पनीरसेल्वम के समर्थक थे।

बाद में पलानीस्वामी और पनीरसेल्वम धड़े एक हो गये थे, लेकिन टीटीवी दिनाकरण के नेतृत्व में 18 विधायकों ने बगावत कर दी थी, जिनकी सदस्यता विधानसभा अध्यक्ष ने खत्म कर दी थी। उधर मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की मौत के मामले की जांच के लिए आयोग के गठन का विरोध करने वाली याचिका खारिज कर दी।