10% से ज्यादा पॉजिटिविटी रेट वाले इलाकों में लॉकडाउन की जरूरत- AIIMS निदेशक

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देश में भयावह रूप ले चुकी कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और कई शहरों में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। दिल्ली समेत कई शहरों में पॉजिटिविटी 30 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसी बीच दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निदेशक डॉ गुलेरिया ने जिन इलाकों में पॉजिटिविटी रेट 10 प्रतिशत से अधिक है, वहां लॉकडाउन लगाने का सुझाव दिया है।

क्या होती है पॉजिटिविटी रेट?
कुल सैंपल में से जितने सैंपलों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि होती है, उसे पॉजिटिविटी रेट कहा जाता है। 30 प्रतिशत पॉजिटिविटी रेट का मतलब है कि टेस्ट किए गए 100 सैंपलों में से 30 में कोरोना संक्रमण पाया जा रहा है।

संक्रमण की इस रफ्तार का अंदाजा नहीं लगा पाई सरकार- गुलेरिया
NDTV से बात करते हुए डॉ गुलेरिया ने कहा कि सरकार कोरोना के नए वेरिएंट के जरिये इतनी तेजी से संक्रमण फैलने का अंदाजा नहीं लगा पाई थी और आज इसी का खामियाजा स्वास्थ्य व्यवस्था भुगत रही है। उन्होंने कहा कि संक्रमण की चेन तोड़ने और लगतार तेजी से बढ़ रहे सक्रिय मामलों का बोझ घटाने की बहुत जरूरत है। गौरतलब है कि इन दिनों देश के कई शहरों में ऑक्सीजन, बिस्तर और दवाओं की भारी कमी चल रही है।

स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने और मामले कम करने की जरूरत- गुलेरिया
डॉ गुलेरिया ने कहा कि अभी दो तरीकों से काम किया जाना जरूरी है। सबसे पहले काम स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करना है और दूसरा कोरोना के मामलों को कम करना है। उन्होंने कहा, “इसके लिए हमें ऊंची पॉजिटिविटी रेट वाले इलाकों को देखना होगा। अगर यह ज्यादा ऊंची है तो हमें कंटेनमेंट जोन और यहां तक कि लॉकडाउन की जरूरत पड़ेगी। इससे संक्रमण की चेन टूटेगी और मामलों की संख्या कम होगी।”

गुलेरिया बोले- इस लहर में नहीं मिला मौका
डॉ गुलेरिया ने कहा, “स्वास्थ्य व्यवस्था संक्रमण के बढ़ते मामलों की कीमत चुका रही है। जिंदगियां बचाना बहुत जरूरी है, लेकिन हमें संक्रमण की चेन तोड़कर मामलों को कम करना होगा।” उन्होंने आगे कहा, “हमें इतनी तेजी से मामले बढ़ने का अंदाजा नहीं था। पहली लहर धीमी थी और हमारे पास अस्पतालों में बिस्तर, दवाएं आदि बढ़ाने का समय था। इस बार हमें मौका ही नहीं मिला, लेकिन हमें ज्यादा सावधान रहना था।”

“संदिग्ध मरीजों को भी पर्याप्त इलाज की जरूरत”
AIIMS निदेशक ने यह भी कहा कि कोरोना के संदिग्ध मरीजों को भी जरूरी इलाज दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों में संक्रमण के लक्षण दिख रहे हैं और उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई है, उन्हें भी इलाज की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों में महामारी के लक्षण हैं, उन्हें कोरोना देखभाल केंद्र में भर्ती किया जाना चाहिए और उनका इलाज कोरोना संक्रमितों की तरह होना चाहिए।

देश में क्या है संक्रमण की स्थिति?
भारत में बीते दिन कोरोना के 3,49,691 नए मामले सामने आए और 2,767 मरीजों की मौत हुई। ये देश में एक दिन में सामने आए सबसे ज्यादा मामले और मौतें हैं। इसी के साथ देश में कुल संक्रमितों की संख्या 1,69,60,172 हो गई है। इनमें से 26,82,751 सक्रिय मामले हैं और 1,92,311 लोगों को इस खतरनाक वायरस के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी है। अमेरिका के बाद भारत दुनिया का दूसरा सर्वाधिक प्रभावित देश बना हुआ है।