यमुना पर लखवाड़ परियोजना के लिए केंद्र और 6 उत्तरी राज्यों के बीच समझौता

शेयर करें:

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री समेत छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने लखवाड़ परियोजना को नई दिल्ली में हरी झंडी दे दी. चार हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना से बिजली उत्पादन और जल संग्रहण होगा. जिससे छह राज्यों में जलापूर्ति समेत पानी की किल्लत दूर होगी.

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने लखवाड़ परियोजना को हरी झंडी दिखाई. परियोजना को पूरा करने के लिए छह राज्यों के मुख्यमंत्री ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. बिजली, जलापूर्ति समेत जल संकट की चुनौती को ये परियोजना दूर करेगी. लगभग 42 सालों से यह योजना लंबित थी. योजना आयोग ने 1976 में ही इस योजना को मंजूरी दी थी. 1992 तक इस परियोजना पर लगभग 35 फीसदी काम पूरा भी हो गया था.

लखवाड़ जल विद्युत परियोजना पर लगभग 4,000 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है. कुल खर्च का 90 फीसदी केंद्र और बाकी राज्य सरकारें वहन करेंगी. योजना से 300 मेगावाट बिजली, 33,780 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई और 330 मिलियन क्यूबिक लीटर जल का संग्रहण हो पाएगा. जिसमें 78 मिलियन क्यूबिक लीटर पानी पीने और घरेलू कार्यों में खर्च होगा.

यहां से छोड़े जाने वाले पानी का छह राज्यों में बंटवारा होगा. राज्यों में जल की किल्लत दूर होगी. परियोजना से उत्तराखंड को 300 मेगावाट बिजली का सीधा लाभ मिलेगा. जाहिर है यमुना पर देश में ऐसी 34 परियोजनाएं तैयार हो रही हैं. जिसमें 12 परियोजनाएं अकेले दिल्ली में हैं. परियोजनाओं के पूरा होने से यमुना के जल विस्तार में भी काफी इज़ाफा होगा.