केजरीवाल माफी लिस्‍ट : गडकरी-सिबल से माफी मांग ली, अब सबकी नजरें अरुण जेटली से माफी पर

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अरविंद केजरीवाल को मार्च-अप्रैल महीने में 24 बार विभिन्‍न मामलों में अदालत के समक्ष प्रस्‍तुत होना है। इनमें सबसे प्रमुख मामला वित्‍त मंत्री अरुण जेटली की ओर से दायर मानहानि वाद है। जेटली ने केजरीवाल पर 10 करोड़ रुपये का मुकदमा किया है।

आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और कांग्रेस नेता कपिल सिब्‍बल से माफी मांग ली। एक अदालत को जानकारी दी गई कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गडकरी को पत्र लिखकर भाजपा नेता के खिलाफ दिये गये कुछ बयानों पर खेद जताया है। गडकरी ने केजरीवाल के खिलाफ एक मानहानि वाद दायर किया है। केजरीवाल और गडकरी ने अदालत के सामने संयुक्त आवेदन दायर करके आप नेता के खिलाफ दायर मानहानि मामला वापस लेने का अनुरोध किया। सोलह मार्च को लिखे गये पत्र में कहा गया, “मैंने सत्यापन के बिना कुछ बयान दिये, ऐसा लगता है कि इन बयानों ने आपको ठेस पहुंचाई और इसलिए आपने मेरे खिलाफ मानहानि मामला दायर किया। मुझे आपसे निजी परेशानी नहीं है। मैं इस पर खेद प्रकट करता हूं।”

दूसरी तरफ, केजरीवाल और सिसोदिया ने अपने माफीनामे में सिब्बल के खिलाफ लगाए ‘बेबुनियाद आरोपों’ के लिए एक पत्र में माफी मांगी। यह पत्र अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल को सौंपा गया। सिब्बल और आप नेताओं ने संयुक्त आवेदन देकर अदालत से मामला वापस लेने का अनुरोध किया। यह वाद वर्ष 2013 में दायर किया गया था। अदालत ने मामले पर सुनवाई की तारीख छह अप्रैल तय की। तब अदालत लिखित माफीनामे को देखते हुए मामले को मैत्रीपूर्ण ढंग से निबटारा करने की मांग करने वाले संयुक्त आवेदन पर विचार करेगी।

AAP पार्टी हाईकमान के निशाने पर पंजाब के बागी विधायक

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल द्वारा पंजाब के पूर्व राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से माफी मांगने के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी दो फाड़ हो गई है. पार्टी का एक धड़ा अरविंद केजरीवाल के साथ खड़ा है तो दूसरे धड़े ने केजरीवाल से दूरी बनाते हुए उनके माफीनामे पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

यही कारण है कि पार्टी हाईकमान द्वारा रविवार को दिल्ली में आयोजित बैठक में 20 विधायकों में से सिर्फ 10 विधायक ही बैठक में पहुंचे. यानी आधे विधायक बागी हैं और उन्होंने हाईकमान को सीधे-सीधे यह कह दिया है कि अगर वो बात करना चाहते हैं तो उसके लिए चंडीगढ़ आएं. उधर बागी विधायकों की हेकड़ी से नाराज आम आदमी पार्टी हाईकमान ने साफ हिदायत दी है कि उनको अनुशासन में रहना होगा. जो भी विधायक पार्टी के खिलाफ जाएगा उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

अनुशासन के डंडे से घबराए पंजाब के विधायकों ने सोमवार को प्रस्तावित बैठक के आयोजन से गुरेज किया. यही नहीं पार्टी के खिलाफ बगावत के सुर बुलंद करने वाले पंजाब में नेता विपक्ष सुखपाल सिंह खैरा ने तो इस मुद्दे पर बात करने से ही इनकार कर दिया. सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि ‘मुझे पार्टी के मसले पर कुछ भी नहीं कहना, अगर कोई बात करनी होगी तो आपको बता दिया जाएगा.’

उधर केजरीवाल के माफीनामे से खड़े हुए विवाद को विपक्षी पार्टियां भुनाने में लगी हैं. अकाली दल नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल द्वारा माफी मांगे जाने से यह साबित हो गई है वह एक बड़बोले नेता हैं और वह लोगों को गुमराह करने के लिए कुछ भी बोल सकते हैं भले ही बाद में माफी मांगनी पड़े.

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पहले ही कह चुके हैं कि ‘मरे और मुकरे’ का कोई विश्वास नहीं किया जा सकता. उधर रविवार को बैठक में भाग लेने गए आप के 10 विधायकों को अरविंद केजरीवाल ने माफीनामे का जो कारण कारण दिया है वह भाजपा के गले नहीं उतर रहा. गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने बैठक में मौजूद विधायकों से कहा था कि उनके खिलाफ 22 न्यायालयों में 33 मुकदमे दर्ज किए गए हैं जिनकी पैरवी में ही महीने के 20 दिन गुजर जाते हैं जिससे दिल्ली सरकार का कामकाज प्रभावित हो रहा है.

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता विनीत जोशी ने कहा कि मुकदमे की अरविंद केजरीवाल का जवाब महज खानापूर्ति के लिए है क्योंकि यह मुकद्दमे अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दर्ज किए गए हैं ना कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के खिलाफ. अरविंद केजरीवाल एक ऐसे नेता हैं जो बेबुनियाद आरोप लगाने में माहिर हैं और किसी को कभी भी कुछ भी कह सकते हैं.

अरविंद केजरीवाल के माफीनामे के बाद पैदा हुए विवाद के चलते पंजाब का आम आदमी पार्टी संगठन कमजोर पड़ा है. मंगलवार से पंजाब विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है और आम आदमी पार्टी बजाय सत्ता पक्ष को कटघरे में खड़ा करने के खुद ही अपना वजूद तलाश रही है.