काजुओ इशिगुरो को साहित्य का नोबेल

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द रिमेन्स ऑफ द डे उपन्यास के लिए मशहूर ब्रिटिश लेखक काजुओ इशिगुरो को इस वर्ष के साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। स्टॉकहोम में नोबेल कमेटी ने शुक्रवार को इसका एलान किया।

स्वीडिश अकादमी ने अपनी घोषणा में कहा कि 62 साल के लेखक ने शानदार भावनात्मक प्रभाव वाले उपन्यासों में दुनिया के साथ हमारे जुड़ाव की अवास्तविक भावना के नीचे के शून्य को दिखाया है। इशिगुरो ने आठ किताबें और साथ ही फिल्म एवं टेलीविजन के लिए पटकथाएं भी लिखी हैं। उन्हें 1989 में द रिमेन्स ऑफ दि डे के लिए मैन बुकर प्राइज जीता था। जापान के नागासाकी में जन्मे इशिगुरो पांच साल की उम्र में अपने परिवार के साथ ब्रिटेन चले गए थे।

इशिगुरो को चार बार मैन बुकर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया और 1989 में उन्हें दर रिमेंस ऑफ द डे के लिये बुकर पुरस्कार मिला। उन्होंने केंट यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। 62 साल के इशिगुरो के चुनाव ने दो साल तक गैरपारंपरिक साहित्य को नोबेल मिलने के बाद पारंपरिक साहित्य की दुनिया के सबसे बड़े पुरस्कारों में वापसी कराई है।
पुरस्कार देने वाली स्वीडिश एकेडमी की स्थायी सचिव सारा डैनियस कहती हैं,“मैं कहूंगी कि अगर आप जेन ऑस्टीन की कॉमेडी के तौरतरीकों को काफ्का की मनोवैज्ञानिक अंतरदृष्टि से मिला दें तो मेरे ख्याल में आपको इशिगुरो मिल जायेंगे।“

इशिगुरो का जन्म जापान के नागासाकी में हुआ लेकिन उनका परिवार ब्रिटेन चला आया तब उनकी उम्र महज पांच साल थी। द रिमेंस ऑफ द डे में एक बड़े घर का रसोइया अभिजात वर्ग की सेवा में बीती अपनी जिंदगी की ओर मुड़ कर देखता है। यह किताब 20वीं सदी के इंग्लैंड में डाउनटाउन आबे जैसे माहौल के बीच दबी हुई भावनाओं की एक गहरी दुनिया को दिखाती है।