जम्मू- कश्मीर के बदलते आबोहवा का परिचायक बनी ‘कश्‍मीर सुपर 30’ पहल

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एक तरफ जम्मू- कश्मीर में भारतीय सेना पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुकाबला कर रही है तो दूसरी ओर वो राज्य के युवाओं का भविष्य संवारने में भी जुटी है। सेना की पहल और बिहार के सुपर 30 की तर्ज पर श्रीनगर में चलाए जा रहे कश्मीर सुपर 30 के बच्चों ने भी ज़ी मेन्स और एडवांन्सड परीक्षाओं में भारी सफलता हासिल की है। राज्य के कमजोर वर्गों से आनेवाले और सरकारी स्कूलों में शिक्षा हासिल करनेवाले ये बच्चे जम्मू- कश्मीर के अन्य बच्चों को एक नई राह दिखा रहे हैं।

थोड़ी सी मुस्कुराहट और थोड़ा कौतूहल भी। कोई मज़दूर का बेटा है, तो किसी के पिताजी किसान हैं। दरअसल ये बच्चे जम्मू- कश्मीर के हैं, जिन्होंने इस साल जी मेन्स और आईआईटी में प्रवेश के लिए होनेवाले ज़ी एडवांस्ड की परीक्षा में राज्य का परचम लहराया है। ये छात्र भारतीय सेना के ‘कश्‍मीर सुपर 30’ पहल से जुड़े हुए हैं। ।

इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य राज्‍य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के प्रतिभाशाली छात्रों को सहायता उपलब्‍ध कराना है, ताकि वे शैक्षणिक सफलता हासिल कर सकें। इसके लिए छात्रों को इंजीनियरिंग परीक्षा के लिए कोचिंग की सुविधा उपलब्‍ध कराई जाती है। पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड और सीएसआरएल इस पहल के प्रशिक्षण सहयोगी हैं।

सुपर 30 में पहले 30 बच्चों का चयन कर उन्हें परीक्षा के लिए तैयार किया जाता था, लेकिन राज्य में भारी मांग को देखते हुए अब 50 बच्चों को आईआईटी जी के लिए तैयार किया जाता है। पिछले साल इस योजना में 50 छात्रों का चयन किया गया था।

इनमें से 32 छात्रों ने जेईई मुख्‍य परीक्षा 2017-18 में सफलता प्राप्‍त की। इन सफल छात्रों में से 7 छात्रों ने जेईई एडवांस परीक्षा में सफलता हासिल की। अब ये छात्र प्रतिष्ठित आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्‍थानों में शिक्षा हासिल करेंगे। कश्मीर सुपर 30 जम्मू- कश्मीर में सेना के सद्भावना अभियानों का एक तरह से चेहरा बन गया है तो ये राज्य के बच्चों की उच्च शिक्षा को लेकर बढती आकांक्षा और राज्य के बदलते आबोहवा का भी परिचायक बन गया है।