कमलनाथ सरकार के दौरान बीजेपी ने अतिथि विद्वानों के साथ पैदल मार्च किया अब अपनी सरकार आई तो मुंह फेर लिया !

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नियमितीकरण की आस में टकटकी लगाए बैठे अतिथि विद्वानों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़

भोपाल। अल्प मानदेेय अधूरा भविष्य देकर भाजपा सरकार ने भी प्रदेश के महाविद्यालयीन अतिथि विद्वानों का वर्षों तक शोषण किया है। अभी भी इनके शोषण का सिलसिला थमा नहीं है। जब प्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार थी, उस समय वर्तमान शिवराज सरकार ने इनके मुद्दे को विधानसभा में उठाया था और तारांकित प्रश्न भी लगाया था।

अब जब भाजपा की सरकार है तो कांग्रेस के कई विधायको ने विपक्ष में होकर इनके नियमितीकरण और फाॅलेन आउट को अब तक व्यवस्था में नहीं लेने के मुद्दे के लिए प्रश्न विधान सभा के आगामी सत्र में लगाया है। परंतु हल अब तक किसी ने नहीं निकाला है। इन उच्च शिक्षितो के जीवन के साथ राजनीतिक खेल खेला जा रहा है।

यह सभी सन 2002 से कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार से ही कालखंड दर पर नाममात्र के मानदेय में प्रदेश के महाविद्यालयों को इस व्यवस्था के माध्यम से सींचते आए हैं। पूर्व कमलनाथ सरकार के दौरान बीजेपी ने इनके आंदोलन स्थल से लेकर सड़कों पर पैदल मार्च तक किया था।

परंतु अब वहीं शिवराज सरकार को 1 वर्ष सत्ता संभाले बीत गया है। लेकिन अभी भी 600 के लगभग फाॅलेन आउट अतिथि विद्वान 14 महीने से अपने घरों में बेरोजगार बैठे हैं। शिवराज सरकार के तमाम मंत्रियों, विधायको और प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान से गुहार लगाते लगाते यह उच्च शिक्षित तंग आ चुके हैं। फिर भी इनके लिए उचित हल नहीं निकाला गया है।

वही पूर्व कमलनाथ सरकार ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग से हुई सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल, और क्रीड़ा अधिकारी की विवादित और कई न्यायालयीन मामलो में उलझी नियमित भर्ती से चयनितो को इनके पदों पर नियुक्ति देकर दिसंबर 2019 में 2500 के लगभग अतिथि विद्वानों का रोजगार छीन लिया था और उनके गले में फाॅलेन आउट की घंटी बांध दी थी जो अब तक बज रही है।

परंतु कमलनाथ सरकार मार्च 2020 में सत्ता से बेदखल हो गई थी। अब यह सभी शिवराज सरकार की ओर टकटकी लगाए आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं। वहीं शिवराज सरकार इनकी तरफ से मुंह फेर रही है। वहीं नव चयनितो का 2 वर्ष की परिवीक्षा अवधि में भी रसूखदारो के माध्यम से और पैसों की माया से इनके पदों पर कई स्थानांतरण किए जा चुके हैं। आगे भी अनेको आवेदन नव चयनितो द्वारा लगाए गए हैं। जिससे अतिथि विद्वानों को पुनः प्रभावित होने की संभावना है।

इसके अलावा सहायक प्राध्यापक भर्ती 2017 के संबंध में हाल ही में न्यायालय के आदेश के कारण हर विषय में दिव्यांगो को 6 प्रतिशत आरक्षण देने के कारण फिर से विज्ञापन संशोधित कर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग ने निकाला है। जिसमें पदों को बढ़ाकर बताया गया है। जबकि विज्ञापन के समय जो पद निकाले गए थे, उन्हीं में संशोधन करना चाहिए था। परंतु सरकार एक पक्षीय कार्रवाई कर रही है। जिससे कारण कई अतिथि विद्वानों का रोजगार छीनने की पुनः संभावना बनती जा रही है।

अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी का इस बारे में कहना है कि, हम उच्च शिक्षितो के भविष्य को सुरक्षित करने की बजाय अब तक प्रदेश में रही कांग्रेस और भाजपा की दोनों ही सरकारो ने केवल हमारे मुद्दे को राजनीतिक रंग ही दिया है। पिछली कमलनाथ सरकार में 4 माह तक हमारा आंदोलन भोपाल में चला था, लेकिन कुछ नहीं किया था। अतः इस तरह के छल ने हमारा जीवन बर्बाद करके रख दिया है।