साधारण सा जीवन जीने वाली कलिता और चंदना की अब हर जगह है चर्चा, बंगाल में इनकी लड़ाई लोकतंत्र की जीत है!

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भाजपा उम्मीदवार कलिता माझी और चंदना बौरी

राजनीति और चुनाव में एक धारणा यह है कि राजनीतिक दल सामान्य लोगों को टिकट नहीं देते हैं। लेकिन, जब आपकी नजर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहीं बीजेपी की उम्मीदवार कलिता माझी और चंदना बौरी पर पड़ती है तो तमाम धारणाएँ टूट जाती हैं। इससे पता चलता है कि भारत का लोकतंत्र कितना मजबूत है।

कलिता और चंदना को बीजेपी ने बंगाल के मैदान में उतारा है। दोनों की पृष्ठभूमि बेहद सामान्य है। कलिता घर-घर काम करती हैं तो चंदना के पति दिहाड़ी मजदूर हैं।

कलिता माझी पूर्वी बर्दवान के आशाग्राम (आरक्षित सीट) से तो चंदना बांकुरा की सल्तोरा सीट से मैदान में हैं। महिला होने के साथ-साछ इनका चुनावों में उतरना इसलिए भी खास है, क्योंकि दोनों की पृष्ठभूमि बेहद सामान्य है।

कलिता माझी एक साधारण सी महिला हैं जो घर-घर में काम कर अपने परिवार का पेट पालती हैं। आम भाषा में कहें तो वह एक मेड हैं। भाजपा की ओर से टिकट मिलने के बाद वह चर्चा में आई हैं। वह अपने प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती, पर चूँकि रोज-रोज काम निपटाने के बाद प्रचार करने निकलना उनके लिए थोड़ा कठिन था, इसलिए उन्होंने चुनाव तक अपने काम से 1 माह की छुट्टी ली है।

भाजपा उम्मीदवार कलिता माझी (साभार: न्यूजरूमपोस्ट)

कलिता बेहद गरीब परिवार से हैं। उन्होंने प्राइमरी स्कूल की शिक्षा पास करने से पहले ही पढ़ाई छोड़ दी थी। शादी के बाद भी उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। उनके पति प्लंबर का काम करते रहे। सिर्फ़ पति की कमाई से घर नहीं चलता था, इसलिए उन्होंने घर का खर्चा उठाने के लिए घर-घर काम करना शुरू किया।

उनका बेटा पार्थ माझी आँठवी कक्षा में पढ़ता है। उनके मायके की भी स्थिति बहुत दुरुस्त नहीं है। वह 7 बहनों में से एक हैं। उनका एक भाई है। पिता भी मजदूर थे, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। वह भाजपा की ओर से टिकट मिलने के बाद दम लगाकर सफल होने की कोशिश कर रही है। चुनावों में उनका मुख्य मुद्दा गरीब बच्चों की पढ़ाई का है। उनका मकसद गरीब बच्चों को शिक्षा दिलवाना है। वह कहती हैं, “मुझे मालूम हैं गरीब की दशा। मैं गरीब छात्रों को शिक्षा के अवसर देने का भरपूर प्रयास करूँगी।:

दिहाड़ी मजदूर की पत्नी चंदना
माझी की तरह एक दूसरा नाम जो बंगाल चुनावों में चर्चा में है- वह चंदना बौरी का है। 30 साल की चंदना, सल्तोरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की उम्मीदवार हैं। संपत्ति के नाम पर चंदना के पास सिर्फ तीन बकरियाँ, तीन गाय और एक मिट्टी का घर है। घर में न पानी आता है, न शौचालय है। बैंक में कुल जमा 31 हजार 985 रुपए है।

चंदना के पति दिहाड़ी मजदूर हैं। बहुत मेहनत के बाद भी दिन खत्म होते उनके पास सिर्फ 400 रुपए आते हैं। जब मॉनसून के समय अन्य मजदूर काम पर नहीं आते तो चंदना खुद अपने पति की मदद करती हैं। दोनों के पास मनरेगा कार्ड है।

भगवा साड़ी और कमल के फूल के साथ वोट माँगने निकलीं चंदना

चंदना के सपने ज्यादा बड़े नहीं हैं। लेकिन वह अपने घर में एक शौचालय चाहती हैं। अभी पिछले माह ही उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली इंस्टालमेंट से 60,000 रुपए में दो कमरे बनवाए हैं। जिले की भाजपा सदस्य होने के बावजूद उनके लिए टिकट पाना बहुत बड़ी बात है। वह भगवा साड़ी में हर सुबह 8 बजे घर से निकलती हैं। साड़ी पर कमल का फूल होता है और साथ में उनका बेटा। वह लोगों को बताती हैं कि कैसे टीएमसी ने लोगों को लूटा।

अपने पति और परिवार के साथ चंदना बौरी

चंदना को टिकट मिलने की जानकारी स्थानीय लोगों से मिली। लोगों ने टीवी पर देख उन्हें जानकारी दी थी। वह कहती हैं, “मैं गरीब परिवार से आती हूँ। भाजपा ने ये दर्शाया है कि आर्थिक स्थिति का मजबूत होना नेता बनने के लिए जरूरी नहीं है।”

वह बताती हैं कि 2011 में सत्ता में आने के बाद उनके पति को तृणमूल कार्यकर्ताओं ने बहुत सताया था तभी वह भाजपा से जुड़े। इसके बाद 2016 में चंदना, उत्तर गंगाजल घाटी मंडल की महिला मोर्चा में सचिव बनीं। उसके बाद बांकुरा जिले में मुख्य सचिव बनीं। चंदना ने दसवीं तक पढ़ाई की हैं।