बिना जांच पड़ताल किए झूठी खबर फ़ैलाने के आरोप में पत्रकार राजदीप की कटी सैलरी, 2 हफ्ते के लिए हुए आफ‌ एयर

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इंडिया टुडे के जाने माने पत्रकार राजदीप सरदेसाई कभी कभी सरकार के विरोध में इतना उत्तेजित हो जाते हैं कि बिना जांच पड़ताल किए झूठी खबर देने लग जाते हैं। 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली में एक किसान या आंदोलनकारी की मौत होने के बाद इन्होंने ट्विट किया कि आंदोलनकारी की मौत पुलिस की गोली से हुई है। जबकि पुलिस ने बताया कि उसकी मौत ट्रैक्टर पलटने से हुई थी।

राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है। राजदीप ने ट्विटर पर लिखा, “पुलिस फायरिंग में आईटीओ पर 45 साल के नवनीत की मौत हो गई है। किसानों ने मुझे बताया कि उसका ‘बलिदान’ व्यर्थ नहीं जाएगा।”

वजह राजदीप सरदेसाई द्वारा किया गया एक ट्वीट है

 

इस ट्वीट में उन्होंने कहा कि किसान नवनीत सिंह की मौत गोली लगने से हुई है. जबकि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रैक्टर पलटने से नवनीत की मौत हुई है. कुछ लोग ये भी मानते है कि आंसू गैस का गोला लगने से नवनीत ने ट्रैक्टर पर अपना नियंत्रण खो दिया. वहीं, पुलिस का कहना है कि उसकी मौत ट्रैक्टर पलटने से हुई है. पोस्ट-मार्टम रिपोर्ट में गोली लगने से मौत की पुष्टि नहीं हुई है. दरअसल, राजदीप सरदेसाई ने किसान के गोली से मौत की फर्जी खबर ट्वीट कर फैलाई थी. इस वजह से लोग उनकी आलोचना करने लगे. अब वे कई लोगों के निशाने पर है उनकी पत्रकारिता पर सवाल उठाए जा रहे है.

26 जनवरी को दिल्ली में आईटीओ के पास एक ट्रैक्टर चालक ने पुलिस पर अपना ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की। अपने बचाव में पुलिस वाले बाएं दाएं भागे तो उसने ट्रैक्टर को तेज स्पीड से जिगजैग घुमाना शुरू किया। स्पीड ज्यादा होने के कारण वह उस पर निरंतर नहीं रख पाया और ट्रैक्टर पलट गया। पलटे हुए ट्रैक्टर के नीचे उसका ड्राइवर भी दब गया और घटनास्थल पर ही उसकी मृत्यु हो गई। राजदीप सरदेसाई ने उस ड्राइवर की दिल्ली पुलिस की गोली से हुई हत्या का ट्वीट अपने टि्वटर हैंडल पर किया। इस प्रकार राजदीप ने देश को दंगों की आग में झोंकने का प्रयास किया । गिरफ्तारी तो कम से कम होनी ही चाहिए।

राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट में क्या लिखा

अपने पहले ट्वीट में राजदीप सरदेसाई ने लिखा, “आरोपों के अनुसार एक 45 साल के व्यक्ति नवनीत की मौत पुलिस फायरिंग में आईटीओ पर हो गई है. किसानों ने मुझसे कहा है कि यह ‘बलिदान’ बेकार नहीं जाएगा. #groundzero.” भले ही ‘Allegedly’ लिखा हो, लेकिन हर कोई जानता है कि सोशल मीडिया में इस तरह के ट्वीट का कैसा असर होता है. इससे हिंसा भड़क सकती थी. खैर, यह खबर गलत निकली.

राजदीप सरदेसाई और विवादित ट्वीट

इसके बाद उन्होंने वीडियो के साथ ट्वीट किया, “आंदोलनकारी दावा कर रहे हैं कि नवनीत सिंह की मौत दिल्ली पुलिस की गोली से हुई जब वह ट्रैक्टर पर थे. लेकिन यह वीडियो साफ दिखाता है कि ट्रैक्टर पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश में पलट गया था. किसान आंदोलनकारियों का आरोप सच नहीं है. पोस्ट मॉर्टम का इंतजार.” इस तरह राजदीप को दवाब के वजह से अपने पहले ट्वीट को डिलीट करना पड़ा और सच बताना पड़ा.

किसान आंदोलन में राजदीप से जुड़ा यह कोई पहला विवाद नहीं है जब राजदीप सरदेसाई को शर्मसार होना पड़ा है. कई ऐसे मौके आये है जब राजदीप ने पत्रकारिता को शर्मसार किया है. इस बात पर लोगों ने नाराजगी जताई है और उनके गिरफ्तारी की मांग की है। इस ट्वीट को लेकर इंडिया टुडे ग्रुप ने राजदीप सरदेसाई की एक महीने की सैलरी काट ली है और 2 हफ्ते के लिए आफ‌ एयर कर दिया है। अर्थात वे 2 हफ्ते तक टीवी पर न्यूज नहीं पढ़ सकते।

बिना लोगो के पहुंचे थे राजदीप

राजदीप सरदेसाई ट्रैक्टर परेड के तीन आईटीओ पर भी ट्रोल हुए थे. दरअसल, किसानों में गोदी मीडिया को लेकर आक्रोश है. राजदीप के टीवी चैनल आजतक ने किसानों की बात सरकार के तुलना में काफी कम मात्रा में या न के बराबर चलाई है. 26 जनवरी को पहचान छिपाने के लिए राजदीप बिना लोगों और पहचान के आईटीओ पर पहुँच गए. लोगों में पहले से ही गोदी मीडिया के खिलाफ नाराजगी थी, पहचान छिपकर की जा रही इस रिपोर्टिंग से किसान खफा हो गए और राजदीप को लौटा दिया.

पहले भी घिर चुके है राजदीप सरदेसाई

इसी सप्ताह राजदीप सरदेसाई एक और मौके पर फर्जी ट्वीट के लिए घिर चुके है. दरअसल, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक तैल चित्र का अनावरण राष्ट्रपति भवन में किया गया था. राजदीप ने इसे भी फर्जी तस्वीर करार दे दिया था.

हालाँकि बाद में नेताजी के परिजनों ने सफाई दी थी कि तैलचित्र की तस्वीर फर्जी नहीं है. इसके बाद राजदीप ने अपनी ट्वीट डिलीट कर दी. लेकिन राजदीप सरदेसाई ने यहाँ भी माफ़ी नहीं मांगी. बात सिर्फ यहीं नहीं रूकती. राजदीप ने पूर्व राष्ट्रपति स्व० प्रणब मुखर्जी के निधन की भी फर्जी खबर चला दी थी. बाद में उन्हें माफ़ी मांगने के साथ ही ट्वीट डिलीट करना पड़ा था.

कभी इंडिया टुडे मैगज़ीन का मैनेजिंग एडिटर और राजदीप सरदेसाई का सहयोगी रहे प्रोफेसर दिलीप सी मंडल कहते है, “मीडिया जनता की नज़र में इतना गिर गया है और उसे इतना एकपक्षीय मान लिया गया है कि टीवी रिपोर्टर और एंकर जब जनता के बीच जा रहे हैं तो माइक पर अपने चैनल का लोगो यानी निशान तक नहीं लगा पा रहे हैं. सेकुलर और कम्यूनल दोनों तरह के पत्रकारों को जनविरोधी माना जा रहा है. यह चिंतनीय है!”