राजनीतिक गलियारों में चर्चा : जितिन प्रसाद की बगावत कांग्रेस के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं

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नई दिल्ली. कांग्रेस का हाथ छोड़ भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने वाले पूर्व मंत्री जितिन प्रसाद को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है. दरअसल कभी कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में से एक और राहुल गांधी के सबसे करीबी नेताओं में माने जाने वाले जितिन प्रसाद का अचानक पार्टी छोड़कर बीजेपी में चले जाना कांग्रेस के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है.

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण नेताओं में के बड़े शहरों में से एक जितिन प्रसाद का बीजेपी में जाने से कांग्रेस को आने वाले विधानसभा चुनावों में बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है. बताया जा रहा है कि जितिन प्रसाद पिछले कुछ समय से पार्टी हाईकमान से नाराज चल रहे थे. कई बार उन्हें पार्टी की तरफ से नजरअंदाज किया गया, जिसके बाद उन्होंने पार्टी से किनारा करते हुए भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया. मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद जितिन प्रसाद का कांग्रेस छोड़ना राहुल गांधी के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है.

कौन है जितिन प्रसाद

पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद कांग्रेस के दिग्गज नेता जितेंद्र प्रसाद के बेटे हैं. जितेंद्र प्रसाद कांग्रेस राज में प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव के राजनीतिक सलाहकार थे और उन दिनों वह पार्टी के दिग्गज नेताओं में से एक माने जाते थे. साल 2000 में जितेंद्र प्रसाद ने सोनिया गांधी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गए थे. 2001 में जितेंद्र प्रसाद का निधन हो गया था. जिसके बाद जितिन प्रसाद ने पिता के राजनीतिक विरासत को संभालते हुए इंडियन यूथ कांग्रेस से 2001 में ही जुड़ गए. उन्हें कांग्रेस यूथ विंग का सेक्रेटरी बनाया गया. 2004 में कांग्रेस ने उन्हें शाहजहांपुर सीट से प्रत्याशी बनाया और वह पहली बार लोकसभा पहुंचे, जहां उन्हें मंत्री के पद से नवाजा गया. उस दौरान व केंद्रीय मंत्री बनने वाले सबसे युवा चेहरों में से एक थे.

इसके बाद फिर 2009 में जितिन प्रसाद को यूपी की धौरहरा सीट से पार्टी ने मैदान में उतारा. एक बार फिर जीत हासिल करते हुए जितिन प्रसाद लोकसभा पहुंचे और मनमोहन सरकार में उन्हें फिर से पेट्रोलियम और सड़क परिवहन जैसे अहम मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई. साल 2014 में जितिन प्रसाद मोदी लहर में लोकसभा चुनाव हार गए.

2017 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जितिन प्रसाद को तिलहर विधानसभा सीट से मैदान में उतारा था, जहां वह बीजेपी के रोशन लाल वर्मा से 5000 वोटों से हार गए. फिर से साल 2019 में जितिन प्रसाद मैदान में थे जहां उन्हें एक बार फिर बीजेपी प्रत्याशी से हार का मुंह देखना पड़ा था.

केंद्रीय नेतृत्व पर उठा चुके थे सवाल

पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने 23 नेताओं के साथ मिलकर कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व में बदलाव और इसे ज्यादा सजीव बनाने के लिए पत्र लिखा था. जिसका पार्टी के कई नेताओं ने विरोध भी किया था.

प्रियंका गांधी के नेतृत्व से थे खफा

जितिन प्रसाद को प्रदेश के बड़े ब्राह्मण नेताओं में से एक माना जाता है. वह लंबे समय से ब्राह्मण समाज के हक में बात करते आ रहे थे. हालांकि कांग्रेस के उत्तर प्रदेश नेतृत्व से वफा से नाराज चल रहे थे. उनका कहना था कि कांग्रेस का प्रदेश नेतृत्व उन्हें समर्थन नहीं दे रहा है. बताया जा रहा है कि जितेन्द्र प्रसाद प्रियंका गांधी के उत्तर प्रदेश की कमान संभालनें के बाद से ही नजर अंदाज किए जाने लगे थे. उन्होंने प्रदेश नेतृत्व को लेकर पार्टी हाईकमान से शिकायत भी की थी और उन्हें बार-बार नजरअंदाज किया गया. जिससे नाराज जितिन प्रसाद ने बीजेपी का दामन थाम लिया.

राहुल गांधी के करीबी थे

जितिन प्रसाद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के टीम के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक थे. उनका पार्टी छोड़ना राहुल गांधी के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है. कहा जा रहा है कि यूपी विधानसभा चुनावों से पहले जितिन प्रसाद का इस तरह से नाराज होकर पार्टी से निकल जाना प्रियंका गांधी की विधानसभा चुनाव से पहले ही बड़ी हार है.