आईएसए: 62 देशों ने अपनाया दिल्ली एजेंडा

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पहले अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन सम्मेलन में 62 देशों ने दिल्ली एजेंडे को दी मंजूरी । सदस्य देशों ने आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा को प्राथमिकता देने और उसे किफायती बनाने पर जताई प्रतिबद्धता। प्रधानमंत्री मोदी ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए करीब 1.4 बिलियन डॉलर का के सहयोग की घोषणा की ।

अन्तरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में दुनिया के 47 देश शामिल हुए। इसके पहले सम्मेलन का आग़ाज राष्ट्रपति भवन में हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेजबानी की। ये पहल है मानवता के लिए ये क़दम है धरती पर जीवन को संरक्षित और सुरक्षित रखने के लिए। दुनिया के 121 देश ऐसे हैं जो कर्क और वृश्चिक रेखा के बीच हैं और इनमें लगभग पूरे साल सूरज की रौशनी उपलब्ध होती है। इनमें से 61 देश गठबंधन में शामिल हो चुके हैं, और 32 देशों ने फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर भी किए हैं।

गौरतलब है कि 30 नवम्बर, 2015 को संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में इस पहल की शुरुआत भारत और फ्रांस ने मिलकर की थी। उन्होने कहा कि भारत परंपरा से ही मानव कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होने दुनिया की सभ्यताओं सहित ख़ासकर भारतीय दर्शन और सभ्यता में सूर्य की अहमियत को भी उकेरा। वज़ह यही रही कि सम्मेलन में मोढ़ेरा सूर्य मंदिर की ही प्रतिकृति दुनिया के सामने रखी गई। गौरतलब है कि 11वीं सदी में कर्क रेखा पर मोढेरा मंदिर में सूर्य की मूर्ति अपनी अनोखी ईरानी शैली में मौजूद है।

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति मैंक्रों के साथ सभी सदस्य देशों ने सम्मेलन का सामूहिक उद्घाटन किया। ये प्रतीक़ था गठबंधन के उद्देश्यों और प्रयासों में एकता लाने का। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जैसा विकासशील देश धरती के भविष्य और जीवन को बनाए रखने के लिए तेज़ी के साथ काम कर रहा है। भारत 2022 तक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से 175 गीगावॉट ऊर्जा पैदा करने में सक्षम होगा।

साथ ही उन्होने कहा कि फिलहाल सिर्फ सौर ऊर्जा स्रोत से भारत 20 गीगावॉट ऊर्जा पैदा कर रहा है और 2022 तक इसे 100 गीगावॉट किया जाएगा। भारत अपने प्रयासों से ऊर्जा ख़पत को कम कर रहा है। साथ ही गैर परंपरागत स्रोतों का उपयोग सिर्फ प्रकाश के लिए ही नहीं बल्कि कृषि से लेकर अन्य क्षेत्रों में भी किया जा रहा है।

धरती पर जीवन को चुनौतियों से बचाए रखने और गर्म होती धरा, संकट में पड़ते जीवन से मुक़ाबला करने के लिए प्रधानमंत्री ने विकसित देशों से तकनीक का आदान-प्रदान करने की बात कही। उन्होने कहा कि दुनिया के विकासशील देशों के साथ सहभागिता और समग्रता बढ़ाने की ज़रुरत है। सम्मेलन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि मानव के रहने के लिए सिर्फ एक ग्रह है, और इसे हर हाल में बचाना चाहिये। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अथक प्रयासों की सराहना की।

इस मौक़े पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आई एस ए के लक्ष्य को सम्मेलन में रखा। सभी के सुख और सबके कल्याण के दर्शन पर चलकर प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर खड़ा अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन जीवन के सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ा क़दम है।