मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की वोकेशनल ट्रेनिंग

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जर्मनी के सहयोग से दी जायेगी अंतर्राष्ट्रीय स्तर की वोकेशनल ट्रेनिंग
तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री से जी.आई.जेड. जर्मनी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने भेंट की

मन्दसौर @ जर्मनी के सहयोग से मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की वोकेशनल ट्रेनिंग दिलवायी जायेगी। तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास (स्वतंत्र प्रभार), स्कूल शिक्षा एवं श्रम राज्यमंत्री दीपक जोशी ने यह बात 6 सितम्बर को जी.आई.जेड. जर्मनी के भारत में प्रोजेक्ट डायरेक्टर जोहानेस स्ट्रिटमेटर से भेंट के दौरान कही। जोशी ने कहा कि जर्मनी कुशल मानव शक्ति के आधार पर ही विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक देश है। कहा कि प्रदेश के बच्चों को जर्मनी के माध्यम से ऐसी ट्रेनिंग दिलवायी जायेगी, जिससे वे विश्व स्तर की कुशलता प्राप्त कर सकें। जोशी ने बताया कि भारत के जर्मनी से मित्रवत संबंध स्वतंत्रता संग्राम के समय से हैं। स्ट्रिटमेटर ने बताया कि विश्व के कुल 130 देश में जी.आई.जेड. संस्था काम कर रही है। भारत में महाराष्ट, कर्नाटक और राजस्थान में स्किल डेव्हलपमेंट के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। यह संस्था जर्मनी सरकार से संबद्ध है। उन्होंने कहा कि मशीन तो सब जगह लगभग समान हैं, लेकिन कुशल मानव शक्ति ही मशीनों का बेहतर उपयोग कर सकती है। गौरतलब है कि भोपाल का क्रिस्प भी जर्मनी के सहयोग से ही संचालित किया गया था।

डी.एफ.आई.डी. के प्रमुख गेविन मेक्गलिवेरे ने की भेंट
तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री जोशी से ब्रिटेन के मिनिस्टर काउंसलर डेव्हलपमेंट फॉर इंटरनेशनल डेव्हपमेंट (डी.एफ.आई.डी.) गेविन मेक्गिलिवेरे ने भेंट की। डी.एफ.आई.डी. विगत तीन वर्षों से मध्यप्रदेश राज्य कौशल विकास मिशन के साथ काम कर रहा है। जोशी ने कहा कि प्रदेश में निर्माण, कृषि, सोलार एनर्जी, आटो मोबाइल और टूरिज्म सेक्टर में कौशल विकास की अधिक जरूरत है। जोशी ने कहा कि वर्तमान में जिन क्षेत्रों में काम हो रहा है, उनके अतिरिक्त इन क्षेत्रों में भी प्राथमिकता से कार्य करें। इस दौरान संचालक कौशल विकास संजीव सिंह, क्रिस्प के सीईओ मुकेश शर्मा और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।