जैव ईंधन के क्षेत्र में भारत की सफल उड़ान

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जैव ईंधन के क्षेत्र में भारत के लिए आज ऐतिहासिक दिन। देश के पहले बायो फ्यूल कमर्शियल फ्लाइट ने देहरादून से दिल्ली तक सफलतापूर्वक तय किया सफर। प्रधानमंत्री ने की थी हवाई क्षेत्र में जैव ईंधन के इस्तेमाल की अपील। भारत के उड्डयन क्षेत्र में आज का दिन बेहद खास है।

स्पाईस जैट एयरलाईन्स भारत की पहली ऐसी एयरलाईन बन गई है जिसने जैव ईंधन का इस्तेमाल करके सफलता पूर्वक उड़ान भरी। स्पाइस जेट के विमान ने आज देहरादून से दिल्ली के बीच उड़ान भरी और दिल्ली में इसी के साथ ये भारत में बायोफ्यूल से पहली फ्लाइट होगी। अभी तक अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में यह प्रयोग सफल रहा है।

बायो जेटफ्यूल जट्रोफा यानी रतनजोत के बीज से बना है। इससे उड़ान की लागत में 20% तक कमी आएगी। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति में प्रस्तावित परिवहन और विमानन क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक और वैकल्पिक ईंधन को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।

केंद्रीय उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने इस बेहद खास मौके पर कहा कि यह मंत्रालय की महज़ एक शुरूआत है। साथ ही मंत्रालय एक नए एक्शन प्लान पर काम कर रहा है जिसका उद्देश्य 2035 तक पर्यावरण क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव हासिल करना है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने उन सभी वैज्ञानिकों की प्रशंसा की जिनकी मेहनत से यह उपलब्धि हासिल की गई है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत भारतीय पेट्रोलियम संस्थान द्वारा जैव ईंधन विकसित किया गया था। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जो जैव ईंधन के एक मुखर समर्थक रहे हैं, ने कहा की आने वाले वर्षों में जैव ईंधन के उपयोग से विमानन उद्योग को अपनी बैलेंस शीट में सुधार करने में मदद मिलेगी।

केंद्रीय उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने इस बेहद खास मौके पर कहा कि यह मंत्रालय की महज़ एक शुरूआत है। साथ ही मंत्रालय एक नए एक्शन प्लान पर काम कर रहा है जिसका उद्देश्य 2035 तक पर्यावरण क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव हासिल करना है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने उन सभी वैज्ञानिकों की प्रशंसा की जिनकी मेहनत से यह उपलब्धि हासिल की गई है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत भारतीय पेट्रोलियम संस्थान द्वारा जैव ईंधन विकसित किया गया था। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जो जैव ईंधन के एक मुखर समर्थक रहे हैं, ने कहा की आने वाले वर्षों में जैव ईंधन के उपयोग से विमानन उद्योग को अपनी बैलेंस शीट में सुधार करने में मदद मिलेगी।