साल-दर-साल विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत ने स्थापित किए कई कीर्तिमान

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विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की धमक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुनी जा सकती है। इसरो ने साल-दर-साल नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। हाल ही में सौ से ज्यादा उपग्रह एक साथ प्रक्षेपित कर इसरो ने पूरी दुनिया में अपनी शक्ति का लोहा मनवाया। लेकिन मंजिलें अभी और भी हैं। आखिर ये वक्त है नए संकल्पों का, उन्हें पूरा करने का और नए भारत को गढ़ने का।

पिछले तीन साल में भारत के अंतरिक्ष मिशन में तेजी आई है। 2022 तक प्रधानमंत्री एक ऐसे न्यू इंडिया का सपना लेकर आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें वो चाहते हैं कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम राष्ट्र से लेकर समाज और आर्थिक भलाई के लिए हो। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने अभी तक कमाल का काम किया है। कम संसाधन में भी उसने चंद्रयान को चांद पर भेजकर इतिहास रच दिया। पहली ही कोशिश में मंगल ग्रह तक पहुंचने में कामयाब रहने वाला भारत पहला देश बना। 2015 में जीसैट-15 संचार उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया गया।

स्वदेशी क्रायोजनिक रॉकेट इंजन का 800 सेकेंड के लिए जमीनी परीक्षण सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। भारतीय क्षेत्रीय नेवीगेशन उपग्रह प्रणाली में चौथा उपग्रह IRNSS-1डी को जब छोड़ा गया तो दुनिया देखती रह गई। भारत ने खुद का नेविगेशन सिस्टम तैयार कर लिया है। इसरो ने देश के सबसे ताकतवर और अब तक के सबसे भारी उपग्रह प्रक्षेपण रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 को लांच कर दिया है।

जीएसएलवी मार्क-3 को लॉन्च करने के बाद चार टन श्रेणी के उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की दिशा में भारत के लिए नए अवसर खुल गए। एक साथ रिकॉर्ड 104 सैटेलाइट का प्रक्षेपण कर भारत ने अंतरिक्ष में अपने नाम सबसे बड़ी कामयाबी लिखी। भारत का लोहा दुनिया भर ने मान लिया है।

आने वाले समय में इसरो के वैज्ञानिकों ने उपग्रह प्रक्षेपण की एक पूरी सीरीज़ तैयार कर रखी है। इसरो की अगली प्रमुख परियोजना है चंद्रयान-2, जो भारत का चंद्रमा पर दूसरा अन्वेषण मिशन है। यह यान चंद्रमा में मौजूद जीवन की संभावनाओं को खोजेगा। चंद्रयान 2 इसी साल 2017 में चंद्रमा की धरती पर उतरेगा।

इसरो का अगला लक्ष्य है सोलर मिशन आदित्य-एल1, जिसे 2019 में प्रक्षेपित किया जाएगा। इस मिशन के जरिए ये पता लगाया जाएगा कि सूर्य की चमक और सौर वायु पृथ्वी पर संचार नेटवर्क और इलेक्ट्रॉनिक्स में रुकावट क्यों डालती हैं ? इसरो इस काम में भी लगा हुआ है कि वो अपने उपग्रहों को गर्म हवा और सूरज की तेज रोशनी से होने वाले नुकसान से कैसे बचाए।

भारत की ओर से जल्द ही पहली बार शुक्र ग्रह का भी उपयोग किया जाएगा। इसरो की एक महत्वाकांक्षी योजना ये भी है कि मंगल की धरती पर रोबोट रखा जाए। भारत की अंतरिक्ष यात्रा 5 दशक से अधिक का सफर पूरा कर चुकी है। इसरो दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले बेहद कम कीमत पर सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजता है। अमेरिका, जापान, चीन और यूरोप की तुलना में उपग्रह प्रक्षेपण भारत में कई गुना सस्ता है।