भारतीय पत्रकारिता अपने मसालों की तरह ही रोचक है: केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी

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भारतीय जन संचार संस्थान यानि आईआईएमसी, विकास पत्रकारिता में हर साल दो कोर्स करवाता है। चार महीने की अवधि के ये कोर्स जनवरी से लेकर अप्रैल और अगस्त से लेकर नवम्बर तक होता है। इस साल पत्रकारिता के 69वें पाठ्यक्रम में 24 विद्यार्थी है जो अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और पूर्व सोवियत संघ के 16 देशों से यहां आये है। विकास पत्रकारिता के समापन समारोह के मौके पर सूचना और प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने सभी को बधाई देते हुए दीनदयाल उपाध्यय अवार्ड की घोषणा की।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति इरानी ने नई दिल्ली के भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के विकास पत्रकारिता पाठ्यक्रम के 69वें समापन सत्र को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय मूल के लोगों, जिन्होंने विकास पत्रकारिता के लिए अनुकरणीय कार्य किया है, के लिए दीन दयाल उपाध्याय की स्मृति में 25,000 रुपये की एक छात्रवृत्ति की घोषणा की। उन्होंने 16 देशों के विकास पत्रकारिता से जुड़े 25 छात्रों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया। इस अवसर पर स्मृति इरानी ने आईआईएमसी परिसर में राष्ट्रीय मीडिया संकाय विकास केंद्र का उद्घाटन किया। उन्होंने ईसीएचओ न्यूजलेटर, समाचार माध्यम एवं कम्यूनिकेटर पत्रिकाओं को लांच किया।

इस अवसर पर बोलते हुए केंद्री मंत्री ने कहा कि एक ऐसे समारोह की अध्यक्षता करना सम्मान की बात है जो 16 देशों के पत्रकारों को एक छत के नीचे लाता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हमेशा नई चीजें सीखते रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विकास पत्रकारिता एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। स्मृति इरानी ने इसकी पत्रिका के नियमित प्रकाशन के आईआईएमसी के प्रयासों की सराहना की और कहा कि आईआईएमसी की संचार क्षेत्र में एक वैश्विक विरासत है। उन्होंने यह भी कहा कि संचार के विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

उन्होंने भाषण के दौरान कहा कि एक औसत भारतीय प्रतिदिन मोबाइल ऐप पर 200 मिनट व्यतीत करता है और हमारे देश में 65 प्रतिशत वीडियो उपभोग केवल ग्रामीण क्षेत्रों में होता है तथा इसमें और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, इस परिदृश्य में मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग को यह सोचना चाहिए कि उपभोक्ताओं को कौन सी नई चीज प्रस्तुत की जा सकती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पुराने समय की तुलना में जब संपादक का सामग्री पर अंतिम निर्णय होता था, अब समय बदल चुका है। अब उपभोक्ता भी सामग्री पर फैसला करता है और सूचना के स्रोत के बारे में पूछता है। देश के कोने-कोने में होने वाले डाटा विस्फोट के इस युग में अब लोग हर सूचना के लिए गूगल का सहारा लेते हैं और इस वजह से इसका विश्वसनीय होना बहुत महत्वपूर्ण है।

आईआईएमसी महानिदेशक के जी सुरेश ने कहा कि आईआईएमसी ने अभी तक विकास पत्रकारिता पाठ्यक्रम में 127 देशों के छात्रों को प्रशिक्षित किया है जो इस पाठ्यक्रम के महत्व को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि आईआईएमसी एशिया की सबसे पुरानी मीडिया अनुसंधान इकाई है। उन्होंने कहा कि विकास पत्रकारिता विकासशील देशों के सहयोग का एक प्रतीक है और इस पाठ्यक्रम में भाग ले रहे पत्रकार भारत के अनाधिकारिक राजदूत हैं।