भारत ने जापान और दक्षिण कोरिया को लौह अयस्‍क की आपूर्ति को मंजूरी दी

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नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एमएमटीसी लिमिटेड के जरिये जापान की इस्‍पात मिलों (जेएसएम) और दक्षिण कोरिया की पोस्‍को को 64 प्रतिशत से ज्‍यादा लौह सामग्री की किस्‍म के लौह अयस्‍क (गोला एवं बारीक) की आपूर्ति पांच और वर्षों तक करने के लिए दीर्घावधि समझौतों (एलटीए) के नवीकरण को मंजूरी दी है।

वर्तमान एलटीए 31 मार्च 2018 तक वैध हैं। जापान की इस्‍पात मिलों और दक्षिण कोरिया की पोस्‍को के साथ नवीनीकृत एलटीए एक अप्रैल, 2018 से लेकर 31 मार्च, 2023 तक मान्‍य होंगे।
एलटीए के तहत प्रति वर्ष निर्यात किए जाने वाले लौह अयस्‍क की मात्रा 3.80 मिलियन टन (न्‍यूनतम) वार्षिक से लेकर 5.50 मिलियन टन (अधिकतम) वार्षिक होगी और इसके तहत एनएमडीसी एवं गैर-एनएमडीसी दोनों ही मूल के लौह अयस्‍क होंगे। बैलाडीला गोले (लम्‍प) के निर्यात की मात्रात्‍मक सीमा 1.81 मिलियन टन वार्षिक और बैलाडीला बारीक (फाइन) के निर्यात की मात्रात्‍मक सीमा 2.71 मिलियन टन वार्षिक होगी।

इन एलटीए के तहत एमएमटीसी के जरिये जेएसएम और दक्षिण कोरिया की पोस्‍को को आपूर्ति के लिए प्रस्‍तावित लौह अयस्‍क 64 प्रतिशत से ज्‍यादा लौह सामग्री वाली किस्‍म के होंगे। जापान की इस्‍पात मिलें में 3.00 – 4.30 मिलियन टन वार्षिक तो वही पोस्‍को, दक्षिण कोरिया 0.80 – 1.20 मिलियन टन वार्षिक है एफओबी मूल्‍य के 2.8 प्रतिशत कारोबारी मार्जिन के साथ एमएमटीसी के जरिये एकल एजेंसी परिचालन और निर्यात की वर्तमान नीति आगे भी जारी रहेगी।

क्या होगा फायदा

इससे होने वाले लाभ को देखा जाये तो एलटीए के तहत लौह अयस्‍क के निर्यात से दीर्घकालिक साझेदार देशों जापान और दक्षिण कोरिया के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और निर्यात बाजार हासिल करने में मदद मिलेगी, जिससे देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह सुनिश्चित होगा।

उपर्युक्‍त समझौते से भारत को अपने अयस्‍कों के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार हासिल करने और स्थिर आर्थिक परितंत्र सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, जो खनन, लॉजिस्टिक्‍स एवं संबंधित क्षेत्रों में प्रत्‍यक्ष एवं अप्रत्‍यक्ष रोजगार उपलब्‍ध कराता है।

भारत से जापान को लौह अयस्‍क के निर्यात का इतिहास लगभग छह दशक पुराना है और यह जापान के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों का एक अटल अवयव है। एमएमटीसी वर्ष 1963 से ही जापान की इस्‍पात मिलों को और वर्ष 1973 से ही दक्षिण कोरिया को लौह अयस्‍क की आपूर्ति करती रही है। तीन वर्षों तक लौह अयस्‍क की आपूर्ति के लिए जापान की इस्‍पात मिलों (जेएसएम) और दक्षिण कोरिया पोस्‍को के साथ वर्तमान एलटीए की अवधि 31 मार्च, 2018 को समाप्‍त हो जाएगी।

कैबिनेट ने 24 जून, 2015 को हुई अपनी बैठक में एमएमटीसी लिमिटेड को तीन वर्षों की अवधि तक (वर्ष 2015 से लेकर वर्ष 2018 तक) लौह अयस्‍क की आपूर्ति करने के लिए जापान की इस्‍पात मिलों (जेएसएम) और दक्षिण कोरिया की पोस्‍को के साथ दीर्घकालिक समझौते (एलटीए) करने के लिए अधिकृत किया था।