रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट में नोटबंदी के फायदों का जिक्र

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रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट में नोटबंदी का सकारात्मक प्रभाव दिखा, नोटबंदी की वजह से आतंकियों के वित्त पोषण को पर लगी रोक, वित्त मंत्री ने कहा इसका लक्ष्य काले धन पर लगाम लगाना था।

भारतीय रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट 2016-17 के कार्यक्रम में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने विमुद्रीकरण के बाद हुए कई महत्वपूर्ण बदलावों की बात की। उन्होने बताया कि विमुद्रीकरण किसी की संपत्ति को जब्त करने के लिए नहीं था बल्कि इससे कालेधन पर चोट पहुंचाई गई और अर्थव्यवस्था लेसकैश की ओर बढ़ी।

विमुद्रीकरण ने ना सिर्फ काले धन पर करारी चोट की है बल्कि इसने भ्रष्टाचार की जड़ों को भी हिलाकर रख दिया। आंकड़ों के मुताबिक विमुद्रीकरण की वजह से 3 लाख करोड़ रुपए पहली बार बैंकिंग तंत्र में आए। जाहिर तौर पर इसके वैध या अवैध होने की जांच तो की ही जा रही है, लेकिन इसकी वजह से आम लोगों को सीधे फायदा पहुंचा है। इसके चलते बैंक लोन की दरें भी कम हुईं हैं।

विमुद्रीकरण के चलते पहली बार इतना बड़ा पैसा सरकार की जानकारी में आया है, जिसपर टैक्स लगने से सरकार के खाते में पैसा आएगा तो साथ ही बड़ी मात्रा में काले धन का भी खुलासा होगा। आंकड़ों से ये भी पता चलता है कि विमुद्रीकरण की वजह से देश की अर्थव्यवस्था की सफाई भी हो रही है।

इसके चलते अब तक 2 लाख फर्जी कंपनियों का पता चला है, जिससे कालेधन के लेन- देन का कारोबार चलता था। टैक्स रिटर्न में भी इसकी वजह से कई बड़ी गड़बड़ियों का पता चला तो पहली इस साल 56 लाख नए करदाता भी बने। जाहिर तौर पर लंबे समय तक इसका फायदा सरकार को मिलता रहेगा।

इतना ही नहीं विमुद्रीकरण के चलते करीब 18 लाख ऐसे लोगों का पता चला, जिनकी संपत्ति या ट्रांजेक्शन उनकी आय से ज्यादा है। जाहिर तौर पर जांच एजेंसियां भी लगातार अर्थव्यवस्था में दीमक की तरह लगे काले धन के साम्राज्य को खत्म करने में लगी हैं।

इतना ही नहीं रिज़र्व बैंक के मुताबिक इस साल 4 अगस्त को आम लोगों के पास 14, 75, 400 करोड़ की करेंसी थी। पिछले साल यानी विमुद्रीकरण के ठीक पहले मौजूद करेंसी के मुकाबले ये 1, 89, 200 करोड़ रुपए कम है। यानी देश विमुद्रीकरण के चलते लेस कैश तंत्र की तरफ काफी आगे बढ़ा है। जबकि इससे पहले साल दर साल आम लोगों के पास रहनेवाली करेंसी की मात्रा लगातार बढ़ रही थी।

आरबीआई के मुताबिक साल 2015 के मुकाबले साल 2016 में देश में लोगों के पास 2, 37, 850 करोड़ रुपए मूल्य की ज्यादा करेंसी थी। लगातार सामने आ रहे आंकड़ों से पता चला है कि विमुद्रीकरण ने ना सिर्फ काले कारोबार में लगे लोगों की पहचान की है बल्कि सरकार की आमदनी में भी इसकी वजह से काफी इजाफा हुआ है।