मकर संक्रांति का महत्व, शुभ मुहूर्त, भारत में मकर संक्रांति त्यौहार और संस्कृति

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भारतवर्ष में प्रतिदिन कोई ना कोई त्यौहार अवश्य मनाया जाता है. प्रत्येक त्यौहार सिर्फ एक परंपरा नहीं है परंतु उन्हें मनाए जाने का प्रामाणिक वैज्ञानिक कारण भी उपलब्ध है. प्रतिवर्ष जनवरी माह में मकर सक्रांति (Makar Sankranti) का उत्सव मनाया जाता है. मकर सक्रांति का यह फलसफा है भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है. जैसे खिचड़ी (बिहार और उत्तर प्रदेश में), लोहड़ी, पिहू और पोंगल.

मकर संक्रांति के दिन के शुभ मुहूर्त

मकर संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त सुबह 08:30 से 12:30
पुण्य काल अवधि 4 घंटे 26 मिनट
संक्रांति महापुण्य काल मुहूर्त सुबह 08:03 से 08:27 तक
महापुण्य काल अवधि 24 मिनट

मकरसंक्रांति निर्णय
इस वर्ष १४ जनवरी २०२१बृहस्पतिवार को अपरान्ह २:३७ बजे मकर राशि में सूर्य का प्रवेश (संक्रमण ) हो रहा है ,यही संक्रांति काल है। संक्रांति के समय से ८ घंटे बाद तक उसका पुण्यकाल होता है,सूर्यास्त होने पर पुण्यकाल समाप्त हो जाता इस बार ५:१७ बजे सूर्यास्त हो रहा है अतः ऐसी परिस्थिति में अपराह्न २:३७ बजे से सायंकाल ५:१७ बजे तक पुण्यकाल होने से इस समय तक स्नान-दान का महत्व रहेगा । प्रयागराज से पं ऋषि शुक्ल बताते है १५ जनवरी को कोई भी पुण्यकाल नहीं है, अतःमकर संक्रांति १४ को ही उक्त समय में मनाना उपयुक्त होगा।

मकर संक्रांति का महत्व 
पौष माह में जब सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. तब हिंदू धर्म का यह पर्व मकर सक्रांति के रूप मनाया जाता है. मकर संक्रांति के दिन सूर्य अपनी उत्तरायणी गति प्रारंभ करता है. इसलिए इस पर वह को उत्तरायणी पर्व भी कहा जाता है. भगवान शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं और इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं इस दिन जप, तप, ध्यान और धार्मिक क्रियाकलापों का अधिक महत्व होता हैं. इसे फसल उत्सव भी कहा जाता हैं.

इस दिन से पहले सूर्य पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध पर सीधी किरणें डालता है. जिसके कारण उत्तरी गोलार्ध में रात्रि बड़ी और दिन छोटा होता है. इसी वजह से ठंड का मौसम भी रहता है. इसी दिन से सूर्य पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध की ओर बढ़ना शुरू होता है. जिसके कारण मौसम में परिवर्तन होता है और यह कृषकों की फसलों के लिए फायदेमंद होता है. जैसा कि हम सभी जानते हैं भारत पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध पर स्थित हैं.

भारत में मकर संक्रांति त्यौहार और संस्कृति
भारत में फसलों का मौसम और मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2021) का त्यौहार बहुत उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाता है. भारतीय आबादी का एक बड़ा हिस्सा किसानों का है. इसलिए, देश के अन्य हिस्सों संक्रांति अलग-अलग तरीके से मनाई जाती हैं.

थाई पोंगल/पोंगल
तमिलनाडु में मनाया जाने वाला थाई पोंगल, भगवान इंद्र को श्रद्धांजलि देने के लिए चार दिनों का उत्सव है. यह त्यौहार भगवान इंद्र को भरपूर बारिश के लिए धन्यवाद देने का एक माध्यम है और इसलिए उपजाऊ भूमि और अच्छी उपज की कामना स्वरुप यह मनाई जाती हैं. थाई पोंगल समारोह भगवान सूर्य और भगवान इंद्र के लिए किए गए प्रसाद के बिना अधूरा है. थाई पोंगल के दूसरे दिन, ताजा पका हुआ चावल दूध में उबाला जाता है और इसे भगवान सूर्य को अर्पित किया जाता है. तीसरे दिन, मट्टू पोंगल ‘बसवा’- भगवान शिव के बैल को घंटियों, फूलों की माला, माला और पेंट के साथ सजाकर पूजा की जाती है. पोंगल के चौथे दिन, कन्नुम पोंगल मनाया जाता है जिसमें घर की सभी महिलाएँ एक साथ विभिन्न अनुष्ठान करती हैं.

वैशाखी 
इसे “बैसाखी” भी कहा जाता है, पंजाब में यह बहुत उत्साह के साथ मनाया जाने वाला एक फसल त्यौहार है. यह वसंत ऋतु के अनुरूप पंजाबी नववर्ष को भी चिह्नित करता है. यह त्यौहार एक दूसरे को स्वीकार करने और अच्छी फसल की कामना के लिए देवताओं को अर्पित करके के साथ मनाया जाता है. इसी दिन, 13 अप्रैल 1699 को दसवें गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी. सिख इस त्योहार को सामूहिक जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं.

उत्तरायण 
गुजरात राज्य में मकर संक्रांति को उत्तरायण नाम से जाना जाता हैं. इसे विशेष रूप से गुजरात में अच्छी फसल के मौसम की शुरुआत के प्रतीक स्वरूप माना जाता हैं. इस त्यौहार पर पतंग उड़ाने, गुड़ और मूंगफली की चिक्की का दावत के रूप में लुफ्त उठाया जाता है. विशेष मसालों के साथ भुनी हुई सब्जी उत्तरायण के अवसर का मुख्य व्यंजन है.

भोगली या माघ बिहू
भोगली या माघ बिहू असम का एक सप्ताह लंबा फसल त्यौहार है. यह पूह महीने के 29 वें दिन से शुरू होता है, जो 13 जनवरी को पड़ता है और लगभग एक सप्ताह तक चलता है. इस त्यौहार पर लोग हरे बांस और घास के साथ बनी विशेष संरचना “मेजी” (एक प्रकार की अलाव(Bon Fire)) का निर्माण करते हैं और जलाते हैं. इस त्यौहार पर चावल के केक की दावत मुख्य व्यंजन होता है जिसे ‘शुंग पिठा’, ‘तिल पिठा’ और नारियल की मिठाइयों को ‘लारू’ कहा जाता है. असम के मूल निवासी टेकेली भोंगा जैसे खेलों का आयोजन करते हैं, जिसमें पॉट ब्रेकिंग और भैंस की लड़ाई शामिल है.