बैगा परिवार की गरीब बेटी समाज को दिखा रही आइना

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अनुपपुर @ समाज में बुजुर्गों की देखभाल को समस्या के रुप में देखा जाता है। कई बार पारिवारिक कारणों जैसे बच्चों के रोजगार की तलाष में बाहर होने, आय के पर्याप्त साधन नहीं होने या वैचारिक मतभेद आदि इसके प्रमुख कारण हैं। इन सब कारणों के बावजूद समाज में कुछ लोग विपरीत परिस्थितियों में भी अपने दायित्व से पीछे नहीं हटते, चाहे उनको पारिवारिक जीवन में कितनी ही कठिनाइयों का सामना क्यों न करना पड़े, किन्तु अपने सामाजिक एवं नैतिक दायित्व से पीछे नहीं हटते। यही लोग समाज के मार्गदर्शक होते हैं।

बेहद सामान्य सी दिखने वाली उस लड़की के कंधो पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी होगी, यह कोई भी उसे देखकर नहीं कह सकता है। अनूपपुर विकासखंड के डोला रामनगर ग्राम में कलेक्टर अजय शर्मा द्वारा केज कल्चर के माध्यम से मछली पालन करने वाले हितग्रहियों से चर्चा के दौरान देवकी ने अपनी व्यथा बताई। कक्षा आठवीं तक शिक्षा प्राप्त देवकी, विशेष संरक्षित जनजाति बैगा जाति की है तथा अपने माता पिता के घर मे ही रहती है।

पूछने पर बताया कि पिता जी मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है, माँ का देहांत हो चुका है, ऐसे में दो छोटी बहनों के लालन पालन के लिए उसे अपनी ससुराल की बजाय मायके में ही रहना पड़ रहा है। उसने बताया कि आय का कोई स्थायी स्त्रोत नहीं है, लेकिन अभी घर चलाने के लिए वह एक दवा की दुकान में काम कर रही है तथा उससे प्राप्त होने वाली आय से गुजर हो रहा है। ज्योति स्व सहायता समूह के सदस्य के रूप में आधुनिक केज कल्चर पद्धति से मछली पालन गतिविधि से भी देवकी जुड़ चुकी हैं, ताकि ज्यादा आय प्राप्त होने से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।

कलेक्टर द्वारा बैगा जाति की इस युवती के जज्बे की तारीफ करते हुए, उसके इस कदम को अन्य परिवारों के लिए अनुकरणीय बताया। उन्होने कहा कि मन में करने का जज्बा हो तो कोई कहीं से भी अच्छे काम की शुरुआत कर सकता है। संवेदनशील कलेक्टर द्वारा बैगा जाति के महिला मुखिया परिवारों को प्रतिमाह एक हजार रुपये मिलने वाली आर्थिक सहायता को देवकी बैगा को प्रदान किये जाने हेतु जनपद पंचायत अनूपपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को तत्काल आवश्यक कार्यवाही करने के लिए निर्देशित भी किया।