इफी के ‘विशेष दिन’ ने झारखंड को फिल्ममेकिंग स्थल के तौर पर प्रोत्साहित किया

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49वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफी) का ये दिन झारखंड को समर्पित था। ऊबड़ खाबड़ पहाड़ियों और सम्मोहक झरनों से नवाजे गए खूबसूरत नजारों वाले इस राज्य को फिल्म शूटिंग वाले स्थल के तौर पर तब बहुत जरूरी प्रोत्साहन मिला जब गणमान्य लोग इफी में आज ‘झारखंड दिवस’ मनाने के लिए साथ आए।

गोवा की राज्यपाल सुश्री मृदुला सिन्हा, झारखंड सरकार के पर्यटन मंत्री श्री अमर कुमार बावरी, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री अमित खरे, झारखंड के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव श्री सुनील कुमार बर्णवाल, झारखंड के पर्यटन, खेल व कला विभाग के सचिव श्री राहुल शर्मा और गोवा सरकार के पर्यटन सचिव श्री शिव प्रताप सिंह ने पणजी में होटल सिडाडे द गोवा में इस विशेष शाम के उत्सव में हिस्सा लिया। झारखंड के सांस्कृतिक समूहों ने यहां उस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत दिखाते हुए मांदर और बांसुरी की धुनों पर पाइका, मर्दाना झूमर, सरायकेला छऊ, डमकच जैसे स्थानीय नृत्यों का प्रदर्शन किया।

इफी में जुट रहे फिल्म प्रशंसक झारखंड और उसकी पर्यटन पहलों का प्रचार करने वाले बहुत से स्टॉलों के माध्यम से राज्य की कला, संस्कृति और खान-पान की झलक भी यहां देख पा रहे हैं। इस महोत्सव के अलग-अलग स्थलों में प्रस्तुत किए गए राज्य के खान-पान और हस्तशिल्प बहुत सारे लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

2016 में फिल्ममेकिंग को प्रोत्साहित करने के लिए स्पेशल मेंशन पुरस्कार प्राप्त कर चुके झारखंड को उचित तौर पर ही इस साल इफी में ‘फोकस वाला राज्य’ चुना गया है। झारखंड सरकार के फिल्म प्रोत्साहन कार्यक्रम के अंतर्गत झारखंड में फिल्माई गई या राज्य की भाषा या बोली में बनाई गई छह फिल्मों का प्रदर्शन इस महोत्सव में किया जा रहा है।

ये फिल्में हैं – ‘बेग़म जान’ (2017), ‘अ डेथ इन द गंज’ (2016), ‘मोर गांव मोर देश’ (2018), ‘अजब सिंह की गजब कहानी’ (2017) और ‘पंचलैट’ (2017)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एम. एस. धोनी के जीवन पर बनी फिल्म ‘एमएसडीः द अनटोल्ड स्टोरी’ (2016) का प्रदर्शन इफी के ओपन एयर स्क्रीनिंग स्थल पर किया जा रहा है।

जब झारखंड बिहार का हिस्सा था तब सत्यजीत राय और ऋत्विक घटक जैसे महान फिल्मकारों द्वारा झारखंड को सिनेमा परदे पर दिखाया जा चुका है। मगर राज्य का दर्जा प्राप्त करने के बाद कुछ समय के लिए यहां के खूबसूरत नजारों की मौजूदगी फिल्म लोकेशन के नक्शे से उतर गई। मुख्य मंत्री रघुबर दास के सक्षम नेतृत्व में ये राज्य अब फिल्म मेकिंग में अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा फिर से हासिल करने को तैयार है।

जब से झारखंड राज्य फिल्म नीति जारी की गई है तब से ये राज्य फिल्मकारों के बीच अपने यहां की फिल्ममेकिंग से जुड़ी संभावनाओं को लेकर जागरूकता फैलाते हुए आगे बढ़ रहा है। इफी में इन केंद्रित जलसों के माध्यम से इस राज्य को फिल्म मेकिंग उद्योग और पर्यटन दोनों ही लिहाज से मजबूत तरीके से सुर्खियों में रख दिया गया है। ऐसी उम्मीद है कि ये प्रयास स्थानीय कलाकारों के लिए अवसरों के निर्माण में मदद करेंगे और राज्य को एक पर्यटन गंतव्य में तब्दील करने में मदद करेंगे।