बिना जीवन साथी के जिंदगी कितनी खूबसूरत ?

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एकला चलो रे में यकीन रखने वालों की संख्या बढ रही है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि अकेले रहने की भी इच्छा बढ रही है. यू.एस. के जनसंख्या आंकडों के अनुसार वहां 30 से 34 की उम्र के अविवाहित, योग्य सिंगल्स की संख्या बढ रही है. इस आयु-वर्ग के 33 फीसदी लोग ऐसे भी हैं, जो शादी नहीं करना चाहते. लेकिन ज्यादा संख्या लेट मैरिज करने वालों की है. हालांकि 98 फीसदी मानते हैं कि वे लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते चाहते हैं. ये सभी लोग ऐसे हैं, जो व्यक्तित्व, स्मार्टनेस, सफलता के मापदंडों के मुताबिक मिस्टर राइट हैं. ये गंभीर रिश्ते और करियर के बीच तालमेल बिठा सकते हैं.

 

परिवार वह संस्था है जहां औरतों की प्रतिभा चूल्हे-चक्की में व्यर्थ होती है और पुरुष की क्षमताएं पारिवारिक जिम्मेदारियां उठाने में जाया होती हैं. यह बात स्थान-काल-परिस्थिति के संदर्भ में कही गई थी. लेकिन आज की स्थितियां भिन्न हैं. शादी के बगैर भी कंपेनियनशिप में रहा जा सकता है. जरूरी नहीं कि सिंगल लोग गैर-जिम्मेदार हों या शादी से भागते हों. यह भी जरूरी नहीं कि महज इसलिए शादी कर लें कि शादी करनी है. शादी प्यार के लिए की जाती है और यदि प्यार न मिले तो शादी का कोई मतलब नहीं. घर-परिवार-समाज के लिए तो शादी की नहीं जा सकती. अकेले लोग भी खुश रह सकते हैं. दोस्त बनाएं, सामाजिक जीवन में व्यस्त रहें, अपने शौक पूरे करें.

 

अपने काम में इतना व्यस्त रहो कि आपको सोचने का मौका ना मिले
जीवन साथी के बिना जिंदगी जिना नामुमकिन सा है क्योंकि आपको भी पता है लाइफ में एक समय ऐसा आता है जब हमें जरूरत होती है किसी और की जो हमारा ख्याल रखे हमारा ध्यान रखें । और आप पूछ रहे हैं कि बिना जीवन साथी के जिंदगी को खूबसूरत कैसे बनाएं तो मेरे दोस्त मेरा तो यही कहना है कि अगर आप बिना जीवन साथी के जीना चाहते हैं तो इसमें कोई समस्या या प्रॉब्लम नहीं है बस इतना कहना चाहूंगा कि अपने आप में मस्त रहो यार अपने काम के अंदर ध्यान लगाओ और अपने काम को इतना बड़ा करो कि आपको सोचने का मौका ना मिले आपको खुद को इतना वक्त मिले हैं ना कि आप इस बारे में सोचो ।

जिम्मेदारियों का एहसास
हां कुछ बेसिक नीड्स होती हैं यह मैं मानता हूं तो आप उसके लिए बाहर जा सकते हैं और अगर आप शादी नहीं करेंगे तो आपका जीवन व्यवस्थित नहीं होगा सबसे बड़ी समस्या यही होती है कि कि शादी के बाद व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारियों की एहसास होता है कि हमारी यह जिम्मेदारी है हमारे परिवार के प्रति फिर भी अगर आपको सिंगल रहना चाहते तो बहुत अच्छी बात है मजे से जियो लाइफ यार जहां मन करे वहां घूम के आओ जहां मन करे वही रहो।

किसी के संग अथवा किसी के बिना
दुनिया में अधिकांश लोग दुखी दांपत्य जीवन जी रहे हैं। और जो अकेले हैं वह भी पीड़ित और परेशान हैं। किसी के संग अथवा किसी के बिना, दोनों हालात में जिंदगी को खूबसूरत बनाने की एक ही तरकीब है—ध्यान यानी मेडिटेशन की कला। ध्यानी व्यक्ति अपने एकांत में आनंदपूर्ण एवं दूसरों के साथ प्रेमपूर्ण होता है। वह जिसके संग रहेगा उसका जीवन भी सुखमय हो जाएगा। बिना ध्यान के कोई शांत और प्रसन्न नहीं रह सकता, चाहे वह अकेला रहे अथवा जीवन साथी के संग में। ज़िंदगी ख़ूबसूरत है और इसकी ख़ूबसूरती का अनुभव अपनी समझ और हृदय को विकसित करने से होगा न कि जीवनसाथी के भरोसे। जीवनसाथी भी आपका साथ तभी तक enjoy कर पाएगा जब तक आप ख़ुद प्रसन्न हो, वरना वह भी देर सेबर किनारा कर लेगा। इसलिए समझदारी से आगे बढ़ते जाएँ, अपने मन के खोट पता तो होते ही हैं, वह निकलते जाएँ।

आध्यात्मिकता का सहारा
भावनाओं के वशीभूत होकर या परिवार, परिस्थितियों के कारण अगर शादीशुदा जीवन व्यतीत नहीं कर सकते हैं तो अपने आप को परिवार सेवाओं से लेकर समाज सेवाओं मे व्यस्त कर दीजिए. आध्यात्मिकता का सहारा लीजिए.. जब तक व्यक्ति मोह माया ओर वासना से दूर नहीं होगा जब तक जीवनसाथी के बिना रहना बहुत ही मुश्किल हो जाता है.. सबसे बड़ीया हे अपनी ऊर्जा को आध्यात्मिकता की तरफ मोड़ देना.

अपने जीवन के साथी खुद
प्राणी अकेला आता है और अकेला ही जाता है। जो बीच में साथ (शत्रु/मित्र) मिलता भी है वो भी मृत्यु के समय छूट जाता है। जो बहुत अच्छा काम कर चुके हैं या कर रहे हैं वे अधिकतर अकेले ही हैं/थे जैसे जगद् गुरू शङ्कराचार्य, स्वामी राम तीर्थ, विवेकानन्द, अटल बिहारी बाज्पेयी, रतन टाटा, मोदी, योगी आदि। अच्छी समस्याओं पर सोचें और समाधान हेतु कार्य करें। समय व्यतीत हो जायेगा और आप को पता भी नहीं लगेगा। जीवनसाथी के बिना जिंदगी को खुबसुरत बनाने की चाह रखना अर्थात कुटुंब व्यवस्था अथवा संसारी मोहमाया का त्याग करने की चाह रखने के समान है. इस चाह की पूर्ती करना आसान नहीं, इतना जरूर कहना चाहूंगा. ऐसी चाह की पूर्ती के लिये आपको संसारी मोहमाया त्यागकर ईश्वर को मन मे सर्वोच्च स्थान देकर ईश्वरको साथी बनाकर जीवन व्यतीत करना होगा.

सबसे बड़ा स्वास्थ्य धन
कुछ का मानना ये भी है कोई और आपके लिए हमेशा available हो जरूरी नहीं है चाहे वो जीवनसाथी ही क्यू न हो | इसलिए खुद का साथ निभाइए, वैसे वास्तविक जीवनसाथी तो आपका अपना शरीर है जो शुरू से अंत तक आपके साथ रहता है |इसलिए अपने शरीर को स्वस्थ रखने की ओर ध्यान दीजिये | स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है |

ला सकते हैं हजारों चेहरे पर मुस्कान
ये सच हैं कि बिना जीवनसाथी के जीवन नीरस लग सकता हैं लेकिन आप इसे देखने का नजरियाँ बदले बल्कि ये समझे कि ईश्वर ने आपको स्वतंत्र किया हैं कोई बंधन नही हैं । आप एक ऊँची उड़ान भर सकते हैं।आप अपने जीवन को केवल एक परिवार के खुश रखने तक सीमित नही बल्कि हजारों के चेहरे पर मुस्कान ला सकते हैं। जीवनसाथी को छोड़कर जो और रिश्तें हैं उनके साथ पूरी ईमानदारी के साथ और प्रेम के साथ समय बिताए। समाजकल्याण के कार्यो में रुचि लें और अपना सहयोग दें।

कुछ उदाहरण की बात करें तो

रंजित लाल-बर्ड वॉचर
एशिया के जाने-माने बर्ड्स वॉचर और ब‌र्ड्स फ्रॉम माय विंडो जैसी दिलचस्प पुस्तक के लेखक रंजित जी के लिए शादी ऐसा मसला नहीं है, जिस पर ज्यादा बात की जा सके. वे किताबों और चिडियों के बारे में ही बात करना चाहते हैं, लेकिन कुरेदने पर बताते हैं, बचपन में ही पता चला कि मेरे दिल में छेद है. अमेरिका में हुए एक ऑपरेशन के बाद ऐसी समस्या हुई कि चलना-फिरना तक मुश्किल हो गया. लगभग दो साल पूरी तरह बिस्तर पर रहा. अब तक आठ-नौ पेसमेकर लग चुके हैं और पिछले 30 वर्षों से ऐसे ही हूं. इंजीनियर बनने का सपना था, लेकिन ऑपरेशन के बाद कमरे के भीतर सिमट कर रह गया. इसी एकांत ने कमरे के बाहर चहचहाती चिडियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया. बाद में यह शौक इतना बढा कि इसी पर काम शुरू कर दिया. शादी न हो पाने का एक कारण सेहत भी रही. सर्वाइव करने की ही समस्या थी. ऐसे में शादी के बारे में कैसे सोचता.

हालांकि कभी-कभी अकेलापन खलता है. बीमार होता हूं तो जल्दी ठीक होने के बारे में सोचता हूं, क्योंकि करने वाला कोई नहींहै. असल लडाई तो खुद के भीतर होती है. सबको अच्छा लगता है किआसपास लोग रहें. मैं भी बहुत डिमांडिंग था, क्योंकि केयर करने वाले लोग थे आसपास. आज कोई नहींहै तो खुद अपनी केयर कर रहा हूं. किताबें पढना, फिल्में देखना, बच्चों के लिए लिखना, म्यूजिक सीखना-सुनना, यही मेरी दिनचर्या है. अभी एक नई किताब प्रकाशित हुई है. व्यस्त रहता हूं.

फैशन डिजाइनर रवि बजाज
दिल्ली के फैशन डिजाइनर रवि बजाज पिछले 10-11 वर्र्षो से अकेले हैं. रवि के घर पर पिछले दो-तीन सालों से कुक तक नहीं है. पूरे घर की व्यवस्था खुद संभालने वाले रवि का कहना है कि उनका घर किसी भी सामान्य घर की तुलना में व्यवस्थित है. प्राइवेसी पसंद करने वाले रवि का घर दोस्तों के लिए हरदम खुला रहता है.

मिलॉन मुखर्जी-चित्रकार
कामकाज की आपाधापी में जिंदगी के पचास-पचपन साल यूं बीते कि कुछ पता न चला. रोलर-कोस्टर की तरह जिंदगी में भी ढेरों पडाव आए. पिछले 20 वर्र्षो से अकेला हूं मैं. शादी हुई, लेकिन पत्‍‌नी से तालमेल नहीं बैठा और वह चली गईं. तब से न तो कोई आया और न मैंने ऐसी कोशिश की. फिर से घर बसाने जैसी बात दिल में आई ही नहीं. अकेला हूं और इसे अपने ढंग से जीता हूं. न तो कोई बंधन है, न किसी के प्रति जवाबदेही. अकेले रहने का मतलब यह नहीं है कि किसी से जुडाव नहीं हुआ. कुछ रिश्ते भी बने. बीते 15-20 सालों से जिंदगी आजाद पंछी की तरह बिताई है. मैं यकीनी तौर पर मानता हूं कि शादी से पुरुष की आजादी छिन जाती है, रचनात्मक कार्र्यो के लिए वक्त नहीं बच पाता. शादी होने पर रिश्तेदार-बच्चे, उनका भविष्य, रिश्तेदारों के साथ निभाना…ऐसे हजारों कारण होते हैं, जो काम में रुकावट डालते हैं. हालांकि ऐसा नहीं है कि शादीशुदा लोग बेचारे और दुखियारे हैं. इत्तेफाक ही है कि मैं शादी में खुद को फिट नहीं महसूस कर पाता.

ब्लॉगर, कार्टूनिस्ट, लेखक प्रमोद सिंह
अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं..इस गीत से प्रभावित प्रमोद जी के दोस्तों की संख्या बहुत है. कहते हैं, कन्फ्यूज रहा मैं. शादी करना नहीं चाहता था या कहूं कि हुई नहीं. मसरूफ रहा और अपनी शर्तो पर जीना चाहा. लिहाजा कभी मैं नहीं समझ सका दूसरे को तो कभी सामने वाला नहीं समझ सका. अकेले रहने की सुविधा यह है कि किसी के प्रति जवाबदेही नहीं होती. लेकिन यही आजादी असुविधा भी बनती है, क्योंकि अपनी इच्छा से जीने की भी एक सीमा होती है.