सेहत सस्ती है लेकिन बीमारी महंगी है : महिला एवं बाल विकास आशीष जैन

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टीकमगढ़@ राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के संबंध में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में मीडिया कार्यशाला का अयोजन किया गया। कार्यशाला में सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास आशीष जैन ने कहा कि सेहत सस्ती है लेकिन बीमारी महंगी है। उन्होंने इस अवसर पर विस्तार से पोषण के आसान तरीकों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि हर बच्चे को जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पहला गाढ़ा पीला दूध जरूर पिलायें। इसके बाद छः माह तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध पिलायें। छः माह बाद मां के दूध के साथ बच्चे को सम्पूरक आहार की भी शुरूआत करें। जो बच्चे 6 माह की आयु से सम्पूरक आहार लेने की शुरूआत कर देते हैं, उनकी वृद्धि अच्छे ढंग से होती है। बच्चे को छः माह के बाद ऐसा आहार जो आसानी से चम्मच में ठहरे, बच्चे को पोषण दे और बच्चे की स्वास्थ्य जरूरतें पूरी करे। साथ ही दो वर्ष की आयु तक स्तनपान कराने से बच्चे की स्वास्थ्य वृद्धि में मदद मिलती है। पशु आधारित आहार बच्चों के लिये विशेष आहार होते है। इसी प्रकार फलियां जैसे मटर, सेम, मसूर (कुलंथी), मूंगफली आदि भी पोषण के अच्छे स्त्रोत होते हैं।
माताओं तथा परिवारों के लिये मुख्य संदेश
भोजन में केवल आयोडीन युक्त नमक का ही प्रयोग करें। शिशु के आहार में अधिक मिर्च मसाले का प्रयोग नहीं करें। जिन परिवारों में मांसाहार लिया जाता है वे शिशु को 9 माह की उम्र के बाद मछली, अण्डा आदि दें। शिशु को नियमित जांच तथा टीकाकरण हेतु नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर ले जायें। शिशु को 9 माह की उम्र पर विटामिन ए की पहली खुराक खिलवायें। उसके बाद हर 6 माह के बाद 5 वर्ष की उम्र तक विटामिन ए की खुराक पिलवायें।
कुपोषण को दूर करने में सबका सहयोग जरूरी
इस अवसर पर जिला आयुष अधिकारी डॉ. एके उपाध्याय ने कहा कि कुपोषण को दूर करने में सबका सहयोग जरूरी है। उन्होंने बताया कि कुपोषण को रोकने और बाल मृत्यु कम करने के लिये सवास्थ्य एवं महिला बाल विकास एवं सहयोगी विभाग लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा के इसमें समाज के सभी वर्गों की सहभागिता जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि विटामिन सी से भरपूर आहार शरीर द्वारा आयरन के उपयोग में मददगार होते हैं। हरे पत्तेदार तथा नारंगी रंग के फल एवं सब्जियां बच्चे को स्वस्थ रखने तथा आंखों के संक्रमणों से बचाव देते हैं। एक बढ़ते हुये बच्चे को बढ़ी हुई मात्रा में आहार की जरूरत होती है, इसलिये बहुत धीरज के साथ बच्चे को प्रोत्साहित करें एवं खाने में मदद दें, जिससे बच्चा अच्छे से खाना खा सके।
पौष्टिक एवं संतुलित आहार पोषण का आधार
इस अवसर पर सहायक संचालक उद्यान एसके कुशवाहा ने बताया कि पौष्टिक एवं संतुलित आहार पोषण का आधार है। उन्होंने कहा कि पौष्टिक एवं संतुलित आहार मंहगा नहीं होता है बल्कि इसके बारे में जानकारी नहीं होने से लोग कुपोषण का शिकार होते हैं। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक पोषक तत्व हमारे दैनिक भोजन में शामिल है, उसका सही उपयोग करके कुपोषण से बचा जा सकता है।
कुपोषण के दुष्चक्र को तोड़ना आवश्यक
इस अवसर पर डीपीएम सुश्री किरण बिंझानी ने कहा कि कुपोषण के दुष्चक्र को तोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कुपोषण के इस दुष्चक्र को तोड़ने के लिये किशोरी बालिकाओं एवं गर्भवती तथा धात्री महिलाओं को दो वर्ष तक पौष्टिक आहार दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब मां स्वस्थ्य होगी तभी स्वस्थ बच्चे को जन्म देगी। साथ ही उन्होंने कहा कि पहला बच्चा तब हो जब मां कम से कम 20 वर्ष की हो तथा दूसरा बच्चा पहले बच्चे के कम से कम तीन बर्ष बाद पैदा हो, जिससे मां एवं बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। इस अवसर पर मीडिया प्रतिनिधि, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीके तिवारी, जिला आयुष अधिकारी डॉ. ए.के. उपाध्याय, सहायक संचालक उद्यान एसके कुशवाहा, सहायक संचालक कृषि जादौन, डीपीएम सुश्री किरण बिंझानी एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।