हरतालिका तीज : जानिए शुभ मुहूर्त और क्या है इस ब्रत के लाभ?

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#हरतालिकातीज -यह व्रत हर विवाहित और अविवाहित के लिए बहुत ही खास माना जाता है. महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला और निराहार रहकर #तीज का व्रत करती हैं. वहीं कुंवारी लड़कियों के लिए भी यह व्रत काफी खास माना जाता है. मान्यता है कि यदि कुंवारी लड़कियां इस व्रत को करें, तो उन्हें भगवान शिव जैसा पति मिलता है. तीज व्रत करनेवाली की हर मनोकामना पूरी होती है. सुहागन महिलाओं का सौभाग्य अखंड बना रहता है और उसे सात जन्मों तक पति का साथ मिलता है. यह व्रत निर्जला किया जाता है. इसलिए इसे काफी कठिन माना जाता है. यह व्रत बड़े ही विधि-विधान से किया जाता है.

यह पूजा का उत्तम समय

आज दिन के 3:57 बजे से हस्ता नक्षत्र शुरू हो रहा है. इस दिन रात 9:16 बजे तक तृतीया है. इसके बाद से चतुर्थी लग जायेगी. इस बीच पूजा-अर्चना को अति उत्तम माना जा रहा है. तृतीया तिथि बुधवार की रात 9:40 बजे से शुरू हो हो गयी, जो आज रात 9:16 बजे तक है. तीज की पूजा के लिए प्रदोष काल का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. प्रदोष काल में पूजा अर्चना के लिए काफी प्रयुक्त समय मिल रहा है, जिसे काफी शुभ माना जा रहा है.

पूजा की तैयारी हो चुकी

तीज की तैयारी लगभग पूरी हो गयी है. बुधवार को व्रतधारियों ने स्नान ध्यान किया और पूजा के लिए प्रसाद बनाये. बाजारों से फल-फूल की खरीदारी की़ व्रतधारियों ने आधी रात के बाद सरगही किया. गुरुवार को दिनभर उपवास रखकर शाम में पूजा अर्चना करेंगी. नवविवाहितों में इस त्योहार को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है़ कई व्रती घर में ही पूजा-अर्चना करेंगी, तो कई मंदिरों में सामूहिक रूप से आयोजित होने वाली पूजा-अर्चना में हिस्सा लायेंगी़

चौठचंद्र भी कल

मिथिला का लोकपर्व चौठचंद्र शुक्रवार को मनाया जायेगा. इसकी तैयारी पूरी कर ली गयी है. दिनभर उपवास कर शाम में चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है.

इसके लिए घर के आंगन व छतों पर विशेष अर्पण देकर सजाया-संवारा जाता है. इसी अर्पण के बीच पूजन सामग्री को रखा जाता है और व्रत धारी स्नान ध्यान कर चंद्रमा के उदय होने का इंतजार करती हैं. चंद्रमा नजर आने पर उन्हें दूध के अलावा अन्य फूल-फलों से अर्घ्य दिया जाता है. दही से भी अर्घ्य दिया जाता है. पकवान भी बनाये जाते है. खीर सहित अन्य सामग्री तैयार की जाती है. कथा सुनती हैं.

बाजारों में जुटी भीड़

तीज की खरीदारी के लिए बुधवार को व्रतधारियों की भीड़ जुटी़ पूजा सामग्री की खरीदारी की गयी़ बांस की टोकरियों की भी बिक्री खूब हुई़ सड़क किनारे सजी पूजा सामग्री की दुकानों पर कतार लगी रही़ महिलाओं ने दान के लिए चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, माहौर आदि की खरीदारी की़ इसे पूजन के बाद मंदिर में दान किया जाता है़ साथ ही कपड़ा और मिठाई दुकानों में भी सुबह से ही भीड़ जमी रही़

कल मनायी जायेगी गणेश चतुर्थी

कल गणेश चतुर्थी है, जो रात 9:23 बजे तक है. इस दिन शाम में भगवान की पूजा के लिए काफी समय मिल रहा है. वही इस दिन मिथिला का लोकपर्व चौठचंद्र भी है. इस दिन शाम 6:21 बजे चंद्रोदय होगा. रात 8:57 बजे तक चंद्रमा का दर्शन होगा. शाम में चंद्रमा के उदय के बाद व्रत धारी महिलाएं चांद को अर्घ्य देंगी़