जीएसटी काउंसिल का बड़ा फैसला, व्यापारी अब सिर्फ एक GST रिटर्न फाइल करेंगे

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जीएसटी काउंसिल ने आज एक बड़ा फैसला लिया है। अब व्यापारी सिर्फ एक ही GST रिटर्न फाइल करेंगे। ये रिटर्न एक महीने में फाइल करना होगा। जीएसटी काउंसिल की दिल्ली में आज महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में कई फैसले लिए गए हालांकि चीनी पर सेस का फैसला टल गया।

शुक्रवार को हुई जीएसटी की 27 परिषद् की बैठक में आम आदमी को बड़ा तोहफा दिया गया है। परिषद ने कैशलेस लेन देन करने वाले लोगों रियायत देने पर चर्चा की है। इसके लिये एक 2 दिनो के अंदर 5 मंत्रियों की समिति बनाई जायेगी जो इस बारे में आखिरी फैसला लेगी।

जीएसटी परिषद ने चीनी पर उपकर (सेस) लगाने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। यह मामला पांच राज्यों के वित्त मंत्रियों के समूह को भेज दिया गया है, जो इस घाटे में आनेवाले अन्य उत्पादों पर भी सेस के बारे में सैद्धांतिक व्यवस्था देगी।

बैठक में रिटर्न फाईल करने की प्रक्रिया को सरल बनाने एजेंडे में प्रमुख था। अप्रैल महीने में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के जीएसटी रिटर्न के दाखिल होने के बाद सरकार को इसे और आगे बढ़ाने की कोशिश मे लगी है। वित्त सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि जीएसटी के लिए एकल मासिक रिटर्न की नयी प्रणाली छह महीने में लागू हो जायेगी।

जीएसटी परिषद ने जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) को सरकारी कंपनी बनाने की मंजूरी दी. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के रूप में शामिल होने वाले जीएसटीएन में सरकार निजी इकाइयों से 51 फीसदी की हिस्सेदारी लेगी, जिसे राज्य सरकारों के बीच उनके कर के अनुपात मे बांट दिया जायेगा।

पिछले साल जुलाई में जीएसटी लागू होने के बाद अप्रैल में पहली बार जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा गया है। बेहतर आर्थिक माहौल, ई-वे बिल और बेहतर जीएसटी अनुपालन से अप्रत्यक्ष कर संग्रह में में बढ़ोतरी आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। ” कुल सकल जीएसटी राजस्व संग्रह अप्रैल 2018 में 1,03,458 करोड़ रुपये रहा। इसमें सीजीएसटी 18,652 करोड़ रुपये , एसजीएसटी 25,074 करोड़ रुपये , आईजीएसटी 50,548 करोड़ रुपये हैं।

इसमें उपकर 8,554 करोड़ रुपये है जिसमें आयात से प्राप्त 702 करोड़ रुपये शामिल हैं। पूरे वित्त वर्ष 2017-18 में जीएसटी संग्रह 7.41 लाख करोड़ रुपये रहा। मार्च में यह आंकड़ा 89,264 करोड़ रुपये था। जीएसटी कांउसिल की बैठकों मे लगातार प्रक्रिया को सरल बनाने की चर्चा होती रही है। जिससे ना केवल अनुपालन बढ़े बल्कि सरकारी खजाने को भी इसका फायदा मिलेगा। जानकारों की मानें तो जीएसटी संग्रह में वृद्धि अर्थव्यवस्था में तेजी और बेहतर अनुपालन को बताता है।