सरकार के प्रयासों से स्वास्थ्य सेवाएं हुई सस्ती

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हर साल इलाज के चक्कर में तीन से चार करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे चले जाते है। लोगों के आमदनी का एक बड़ा हिस्सा बीमारियों के इलाज में खर्च हो जाता है। महंगे चिकित्सा खर्च को कम करने के लिए पिछले तीन साल में केन्द्र सरकार ने कई कदम उठाए है जिससे लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिल रही है।

लोगों को सस्ती दर पर चिकित्सा सुविधा मिले इसके लिए केन्द्र सरकार ने पिछले तीन साल में कई कदम उठाए है। चाहे वो हार्ट स्टेंट सस्ते किए गए हो, दवाओं के दाम तय किए गए हो या फिर हाल ही में घुटने के प्रत्यारोपण के उपकरणों के सस्ते करने का मामला हो। पिछले हफ्ते ही घुटने के प्रत्यारोपण के उपकरण करीब सत्तर फीसद तक सस्ते किए गए है। सरकार ने कहा है कि अगर कोई अस्पताल तय सीमा से ज्याद रकम लेता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी होगी।

सितम्बर तक 3 हजार प्रधानमंत्री जन औषधालय खुल जाएंगे जिनमें 600 की जगह 1000 दवाएं मिलेंगी साथ ही दवाओं के सप्लाई चेन को भी मजबूत किया जा रहा है

गरीब और मध्य वर्ग को सस्ता इलाज मुहैया कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हार्ट के स्टेंट के दाम को तय किया गया है और अब ये 7 से 31 हजार के बीच आता है। इसी तरह देश में अब तक बाईस सौ से ज्यादा प्रधानमंत्री जन औषधालय खुल चुके है और सितम्बर तक तीन हजार खुल जाएंगे।

इन औषधालयों में अब छह सौ के बजाय एक हजार दवाएं मिलेंगी। जहां एक ओर दवाओं के सप्लाई चेन को मजबूत किया जा रहा है तो दूसरी ओर आठ सौ दवाओं की जगह अब एक हजार दवाओं की कीमत तय किए जाएंगे।