विदेश, रक्षा मंत्री एससीओ की बैठक में लेंगी हिस्सा

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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज आज चीन के बीजिंग में शंघाई सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक में आठ सदस्यीय समूह की बैठक का एजेंडा तय करने के लिए लेंगी हिस्सा। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी एससीओ के रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में लेंगी भाग।

चीन के दौरे पर गईं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज आज शंघाई सहयोग संगठन की विदेश मंत्रीस्तरीय बैठक में भाग लेंगी। ये दो दिवसीय बैठक बीजिंग में कल से शुरू हुई। विदेश मंत्री ने कल चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उपराष्ट्रपति वांग किशान से मुलाकात की।

ये मुलाकातें काफी अहमियत रखती हैं क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर विचारों का आदान प्रदान करने तथा दोनों देशों के बीच परस्पर संवाद को बढ़ावा देने के लिए 27 और 28 अप्रैल को वुहान शहर में एक अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही रक्षा मंत्री सीतारमण भी चीन में है।

सीतारमण भी एससीओ की बैठक में रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगी। उम्मीद की जा रही है कि भारतीय रक्षा मंत्री इस दौरान चीन के कई अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगी। इसमें चीन-भारत के बीच के विवादास्पद मुद्दों पर बातचीत होने के अलावा सहयोग के अवसर तलाश करना भी शामिल है।

शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की बैठक में हिस्सा लेने चीन के दौरे पर गयीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का सोमवार को भी मेल मुलाकातों और बैठकों का दौर जारी रहा। सोमवार को उनकी सबसे अहम मुलाकात हुई चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उपराष्ट्रपति वांग किशान से। दोनों नेताओं के साथ हुई मुलाकात में आपसी हित के तमाम मसलों पर बात हुआ। इसके साथ ही, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आठ देशों के शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक में भी हिस्सा लिया।

सुषमा की आज हुई ये मुलाकातें इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर विचारों का आदान प्रदान करने तथा दोनों देशों के बीच परस्पर संवाद को बढ़ावा देने के लिए 27 और 28 अप्रैल को चीन के वुहान शहर में एक अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

रविवार को सुषमा स्वराज और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद इस दौरे का एलान हुआ। चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि राष्ट्रपति शी के आमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी चीन की यात्रा पर जा रहे हैं।

चीनी विदेश मंत्री ने कहा, ”दोनों नेता उस रणनीतिक प्रकृति पर संवाद करेंगे जो दुनिया में एक सदी में हो रहे बदलाव से संबंधित होगा। साथ ही वे चीन भारत संबंधों के भविष्य के संबंध में दूरगामी व्यापक एवं रणनीतिक मामलों पर भी विचारों का आदान प्रदान करेंगे।” पीएम मोदी की यात्रा से पहले भारत और चीन के बीच हुई इस उच्चस्तरीय मुलाकात में कई सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं।

चीन ने भारत के साथ ब्रह्मपुत्र और सतलज नदी में जल प्रवाह से संबंधित आंकड़ों को साझा करने की व्यवस्था फिर शुरू करने पर सहमति जताई है। नाथुला दर्रे से होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा इस साल से फिर से बहाल होगी। दोनों देशों के बीच आंतकवाद से मिलकर लड़ने पर सहमति बनी। जलवायु परिवर्तन पर भी दोनों देश साथ काम करने को तैयार हुए हैं।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार को भारतीय दूतावास में भारत-चीन मित्रता में हिंदी का योगदान’ विषय पर आयोजित चर्चा में हिस्सा लिया और कहा कि भारतीय और चीनी नागरिकों को एक दूसरे की भाषाएं सीखनी चाहिए. यह उन्हें संवाद की मुश्किलों से उबारने में मदद करेगी और दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंध में और मजबूती आएगी। इस बीच रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी चीन के दौरे पर पहुंच गयी है ।

इस दौरान वह शंघाई कोपरेशन आर्गनाइजेशन में शिरकत करेंगी। उम्मीद की जा रही है कि भारतीय रक्षा मंत्री इस दौरान चीन के कई अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगी। इसमें चीन-भारत के बीच के विवादास्पद मुद्दों पर बातचीत होने के अलावा सहयोग के अवसर तलाश करना भी शामिल है। गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच 73 दिनों तक चले डोकलाम विवाद के बाद रिश्तों में तनाव आ गया था और अब दोनों ही देश आपसी संबंधों में नयी गर्मजोशी लाने की तैयारी में है।