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अमेरिकी क्रूड ऑयल की पहली खेप सितंबर के आखिरी सप्ताह में भारत पहुंचने की संभावना

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अमेरिका मे भारत के राजदूत नवतेज सरना ने अमेरिका से भारत के लिए आयात किए जाने वाले कच्चे तेल के पहले शिपमेंट के कागज़ात टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट को सौंप दिए हैं। इस कदम से दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक-भारत की ऊर्जा सुरक्षा और सुनिश्चित हो सकेगी।

अमेरिकी क्रूड ऑयल के पहले खेप के सितंबर के आखिरी सप्ताह में भारत पहुंचने की संभावना है। अमेरिका में भारतीय राजदूत, नवतेज सरना ने भारत-अमेरिका संबंधों में नया अध्याय खोलने संबंधी इस खरीद के दस्तावेज टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट को सौंप दिये। इस के साथ ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक भारत, ओपेक द्वारा उत्पादन में कटौती के बाद, अमेरिकी क्रूड खरीदने वाले एशियाई देशों दक्षिण कोरिया, जापान और चीन के समूह में शामिल हो गया है। इन देशों ने क्रूड ऑयल की कीमतों में हुई वृद्धि के बाद अमेरिकी सप्लाई की तरफ रुख किया है। इस कदम का भारत के प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति की फोन पर हुई बातचीत मे भी स्वागत किया गया।

अमेरकी क्रूड के सितंबर के अंतिम सप्ताह में ओडिशा के पारादीप तट तक पहुंचने की संभावना है। दिसंबर 2015 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमेरिकी तेल के निर्यात पर 40 साल के प्रतिबंध को हटा दिया था। हालांकि वास्तविक कोशिशें शुरु हुई प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात के बाद, जिसमें दोनों नेताओं ने ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग को आगे बढाने पर सहमत हुए। इसके तुरंत बाद, भारतीय कंपनियों ने अमेरिका से कच्चे तेल की खरीद शुरू कर दी।

दो भारतीय तेल कंपनियों, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम ने चार मिलियन बैरल से अधिक का आदेश दिया। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने जुलाई में अपना पहला ऑर्डर दिया और 10 अगस्त को दूसरा ऑर्डर। भारत पेट्रोलियम ने भी अमेरिकी तेल की अपनी पहली खरीद के लिये आर्डर दिया। बीपीसीएल ने 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक डिलीवरी के लिए मार्स और पोसीडॉन दोनों के 500,000 बैरल कार्गो खरीदा है। अगले 20 वर्षों में, भारत की ऊर्जा खपत का दुनिया मे सबसे तेजी से बढ़ने का अनुमान है। 2035 तक, चीन और भारत का वैश्विक मांग में करी 35 फीसदी का सबसे बड़ा हिस्सा होगा।

अमेरिका से कच्चे तेल के आयात की शुरुआत हो चुकी है। इसके अलावा पिछले कुछ समय में , भारतीय कंपनियों ने संयुक्त राज्य अमेरिका में ऊर्जा से जुड़े संपतितयों को खरीदने में काफी निवेश किया है। भारत और अमेरिका दोनों के लिए ये एक लाभदायक स्थिति है। ये ना केवल अमेरिका और भारत के बीच बढ़ते हुए सामरिक संबंधों को मजबत करता है बल्कि भारत की ऊर्जा जरुरतों को भी सुरक्षित करता है।