प्रयागराज : मशहूर रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजय पांडेय की ब्लैक फंगस से मौत, पीजीआई में चल रहा था इलाज

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प्रयागराज. वैश्विक महामारी कोरोना के खौफ में जी रहे लोगों के लिए ब्लैक फंगस एक नई मुसीबत के रूप में सामने आया है. प्रयागराज में अब तक ब्लैक संगत से सांप संक्रमित मरीजों की पहचान हो चुकी है. इन्हीं में से एक मरीज की मंगलवार शाम को एसजीपीजीआई लखनऊ में मौत हो गई. वह मरीज संगम नगरी के प्रसिद्ध रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर संजय पांडे थे, जो गत 20 अप्रैल से कोरोना संक्रमित चल रहे थे.

उनके दिमाग में ब्लैक फंगस जाने के कारण डॉ. संजय की जान गई है. पहले शहर की ही निजी अस्पताल में इलाज कराने के बाद जब कोई सुधार नहीं हुआ तो 11 मई को परिजनों ने उन्हें एसजीपीजीआई में भर्ती कराया था. डॉ पांडेय की मौत से पत्नी डॉ शालिनी पांडेय और बेटी श्रेया पांडेय गहरे सदमे में हैं.

इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ एमके मदनानी ने बताया कि कोरोना संक्रमित होने के साथ वह ब्लैक फंगस से भी पीड़ित हो गए थे. फंगस के दिमाग में जाने के कारण उनकी हालत काफी खराब हो गई. डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का काफी प्रयास किया, लेकिन नाकाम रहे. उनका लखनऊ में ही बैकुंठ धाम में अंतिम संस्कार कर दिया गया.

बुधवार को उनकी अस्थियों उनके शहर के चर्च लेन स्थित आवास पर लाई जाएंगी. डॉ संजय पांडेय रेडियोलॉजिस्ट के रूप में प्रयागराज मंडल में मशहूर थे उनका शहर के रामबाग में स्थित सुंदरम टावर में रेडियोलॉजी सेंटर है. बेटे के बाद पति का शव देख बिलख पड़ीं डॉ. शालिनी, बेटी श्रेया एसजीपीजीआई में उपचार के दौरान डॉ. संजय की पत्नी डॉ.

शालिनी पांडेय, बेटी श्रेया पूरे समय डटी रहीं. डॉ शालिनी पर करीब चार साल में यह दूसरा वज्रपात है. दिल्ली के सेंट स्टीफेन मेडिकल कॉलेज में चार वर्ष पहले एक साथी डॉक्टर ने उनके बेटे डॉ. शाश्वत की हत्या कर दी थी. मामले की जांच सीबीआई कर रही है. बेटे के बाद पति की मौत ने उनके आघात को और गहरा कर दिया है.

ब्लैक फंगस के सात मरीज अबतक जिले में मिले है. दो मरीजों का उपचार एसआरएन में किया जा रहा है. वहीं तीन मरीज एमडीआई में जांच के दौरान सामने आए थे. एक मरीज टैगोर टाउन व दूसरा लूकरगंज के एक निजी अस्पताल में मिले थे.