पंचायत चुनाव में जान गंवाने वाले कर्मचारी के परिवार को क्यों न दिए जाएं एक करोड़?

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प्रयागराज. पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने के बाद संक्रमित कर्मचारियों की मौत पर मुआवजे के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है. हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से सवाल किया है कि मृत कर्मचारियों केा मुआवजे के रूप एक करोड़ रुपये क्यों नहीं दिए जाएं. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को मुआवजा राशि पर पुनर्विचार करने को कहा है.

हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान वकीलों ने कहा कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को पंचायत चुनाव के दौरान कोरोना संक्रमण के प्रसार की जानकारी थी. इसके बावजूद पंचायत चुनाव को स्थगित नहीं किया गया. कर्मचरियों मसलन शिक्षक, अनुदेशकों और अन्य कर्मचारियों से जबरन ड्यूटी कराई गई. इसके साथ ही प्रशासन ने संक्रमण से बचाव के लिए आवश्यक उपाय भी नहीं किए.

वकीलों ने कहा कि पंचायत चुनाव के बाद प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक, अनुदेशक और अन्य विभागों के कर्मचारी संक्रमित हुए और काल के गाल में समा गए. ऐसे में राज्य सरकार को मृत कर्मचारियों के परिवारों का हित देखते हुए एक करोड़ रुपये की मुआवजा राशि देनी चाहिए. हाईकोर्ट ने भी वकीलों की बात का समर्थन करते हुए राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को दिशा निर्देश दिए हैं.

बता दें कि मृत कर्मचारियों को मुआवजा राशि देने के संबंध में विगत दिनों हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की गई थी. इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मृत कर्मचारियों का पक्ष लिया है और माना है राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के कारण ही प्रदेश में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की मौत हुई और गांवों में संक्रमण का प्रसार तेजी से बढ़ा. हाईकोर्ट संक्रमितों के उपचार में बरती जा रही लापरवाही पर भी राज्य सरकार की फटकार लगा चुकी है.