मालदीव में लगा आपातकाल

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मालदीव में राष्ट्रपति यामीन द्वारा देश में आपातकाल के एलान के साथ गहराया संवैधानिक संकट। सुरक्षा बलों ने पूर्व राष्ट्रपति एम ए गयूम और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस अब्‍दुल्‍ला सईद को किया गिरफ्तार। निष्कासित पूर्व राष्ट्रपति नशीद ने की लोगों से सरकार के खिलाफ सड़कों पर आने की अपील।

मालदीव में बढ़ते राजनीतिक गतिरोध के बीच राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन अब्दुल ग़यूम ने 15 दिनों के आपातकाल का एलान कर दिया है। आपातकाल के एलान के बाद ही पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस अब्‍दुल्‍ला सईद और अन्‍य जज को गिरफ्तार कर राजधानी माले से बाहर ले जाया गया है। हालांकि जजों पर आरोपों के बारे में कोई ब्‍योरा नहीं दिया गया है।

मालदीव पुलिस ने पूर्व राष्टपति मामून अब्दुल गयूम और उनक दामाद को भी कल उनके घर से गिरफ्तार किया। गयूम, यामीन के भाई हैं और देश के सबसे लंबे वक्त तक सत्ता में काबिज़ रहने वाले राष्ट्रपति हैं। उन्हें धुनिधू डिटेंशन सेंटर में ले जाया गया है। आपात काल से जुड़े सरकारी बयान में कहा गया है कि इस वक्त में कुछ अधिकार सीमित रहेंगे। हांलाकि सामान्य आवाजाही, सेवाएं और व्यापार प्रभावित नहीं होंगे। सरकार ने ये भी भरोसा दिलाया है कि देश में मौजूद विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा में कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

दरअसल मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक क़ैदियों को रिहा करने का आदेश दिया था, जिसे मानने से राष्ट्रपति यामीन ने मना कर दिया था। राष्ट्रपति ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने विपक्षी नेताओं के एक समूह की रिहाई का आदेश देने में अपने अधिकारों की सीमा रेखा लांघ ली। कोर्ट के नाम भेजे एक ख़त में राष्ट्रपति यामीन ने अदालत ने अपने फैसले पर फिर से विचार करने को कहा है। ताज़ा घटनाक्रम में कोर्ट के फैसले के खिलाफ खड़ी सरकार के आदेश पर सुरक्षा बलों ने सुप्रीम कोर्ट के गेट को तोड़ दिया है। कोर्ट के बाहर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई है। बहरहाल माना जा रहा है कि आपातकाल के बाद सुरक्षा बलों को संदिग्धों को हिरासत में लेने और गिरफ़्तार करने की अतिरिक्त छूट मिल गई है।

सरकार पहले ही संसद को बर्ख़ास्त कर चुकी है और सेना को आदेश दे चुकी है कि सुप्रीम कोर्ट अगर राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन के ख़िलाफ़ महाभियोग लाने की कोशिश करे तो उसे अमल में आने से रोका जाए। राजधानी माले में इस वक्त सेना तैनात है. सेना ने संसद को चारों तरफ से घेर कर सील कर दिया है. लोग सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं. इस बीच लंदन में निर्वासित निष्कासित पूर्व राष्ट्रपति नशीद ने देश के लोगों से सरकार के खिलाफ सड़कों पर आने की अपील की है।

मालदीव में राष्टपति शासन की घोषणा के बाद अमेरिका ने कहा है कि इस आपात स्थिति में वह मालदीव के लोगों के साथ है। अमेरिका ने मालदीव की सरकार तथा सेना से कानून के शासन का सम्मान करने का आग्रह किया किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी मालदीव के माहौल पर चिंता जताते हुए सभी भारतीय नागरिकों को माले और अन्य क्षेत्रों की यात्रा अगले आदेशों तक नहीं करने की सलाह दी है।

दरअसल राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने पार्टी से अलग हुए 12 सांसदों को बर्खास्त कर दिया था। इन सांसदों ने विपक्ष का दामन थाम लिया था. इनमें से कुछ नेताओं को कैद भी कर लिया था। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 9 राजनीतिक असंतुष्टों की रिहाई और 12 सांसदों की फिर से बहाली का आदेश दिया था. इस पर राष्ट्रपति ने कोर्ट का आदेश मानने से इनकार कर दिया। अगर अब्दुल्ला यामीन कोर्ट का आदेश मानते हुए सांसदों को बहाल करते हैं तो उनकी सरकार अल्पमत में आ जाएगी और उन पर महाभियोग चलाया जा सकता है।