बड़े किसान कृषि उत्पाद आधारित उद्योगों की स्थापना में आगे आएं – संभागायुक्त

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जबलपुर | प्रगतिशील बड़े किसानों को समेकित कृषि प्रणाली को अपनाने के साथ कृषि-उद्यानिकी उत्पादों के बेहतर उपयोग के लिए खाद्य प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, भण्डारण आदि अन्य क्षेत्रों में भी आगे आना चाहिए। इससे कृषि उत्पादों का मूल्यवर्धन कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कृषक को वर्ष भर उत्पादक कार्य करने का अवसर मिलेगा और युवा पीढ़ी को उनकी रूचि के मुताबिक रोजगार का मौका मिलेगा। कृषि क्षेत्र में भी नई पीढ़ी की दिलचस्पी और भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी।

ये बात संभागायुक्त राजेश बहुगुणा ने जिला व्यापार और उद्योग केन्द्र जबलपुर द्वारा मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण विकास संस्थान एवं पंचायती राज संस्थान अधारताल जबलपुर में आयोजित कृषि उत्पाद आधारित उद्योगों से प्रगतिशील कृषकों की आयवृद्धि के लिए आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही।

संभागायुक्त श्री बहुगुणा ने कहा कि प्रगतिशील बड़े कृषकों के पास जमीन, पूंजी के साथ कुछ सीमा तक जोखिम उठाने की क्षमता रहती है। प्राय: कृषकों की वर्ष भर 120 दिन ही कृषि कार्य में व्यस्तता रहती है। शेष दिनों में उनके पास पर्याप्त काम की कमी रहती है।

वे समय का सदुपयोग करते हुए अपनी भूमि का कुछ हिस्सा कृषि उत्पाद आधारित उद्योग स्थापना एवं कार्यों के लिए उपयोग में ला सकते हैं। खेती को एक व्यापार के तरह लिया जाना चाहिए। वर्तमान में कृषि में आवश्यकता से अधिक लोग संलग्न हैं। जब कृषि के साथ कृषि उत्पाद के उद्योगों को स्थापित कर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाया जाएगा तो निश्चित ही युवाओं को रोजगार और आय के नए अवसर मिलेंगे।

संभागायुक्त ने कहा कि बड़े किसानों की पीड़ा है कि घर में अच्छी कृषि होने के बाद भी उनके बेटे इंजीनियरिंग एमबीए आदि करने के बाद 30-40 हजार की नौकरियों के पीछे भाग रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को कृषि उत्पाद आधारित उद्योगों की स्थापना कर आकर्षित किया जा सकता है।

कार्यशाला में संयुक्त संचालक उद्योग आरसी कुरील, महाप्रबंधक जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र देवव्रत मिश्रा ने कृषि आधारित उद्योगों की जानकारी दी। साथ ही नाबार्ड, मप्र वेयर हाउसिंग एवं लाजिस्टिक कार्पोरेशन, उद्यानिकी, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केन्द्र, कृषि विभाग के संयुक्त एवं उप संचालक, सेडमैप के अधिकारियों द्वारा कृषि आधारित उद्योगों की जानकारी दी गई।

प्रगतिशील किसानों ने जिन्होंने उद्योग स्थापित किए हैं अपनी सफलता की कहानी बताईं। कृषक एसके भाटिया ने बताया कि 7 एकड़ भूमि होने के बाद भी उन्होंने पहले कृषि तथा धीरे-धीरे बांस की विभिन्न प्रजातियों से बांस का उत्पादन प्राप्त कर अगरबत्ती उद्योग को अपनाया। उन्नत मशीनों, तकनीक और नवाचार को अपनाकर, वर्तमान में उनका उद्योग 67 लाख टर्न ओवर की स्थिति में है। आगे और बढ़ाने की योजना है।

कार्यशाला का शुभारंभ राज्य में शोक होने की वजह से बहुत ही सादगी और बिना किसी औपचारिकता के साथ हुआ। प्रारंभ में दो मिनिट का मौन धारण कर पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बाबूलाल गौर को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यशाला का संचालन महाप्रबंधक देवव्रत मिश्रा ने किया।