इलाहाबाद में हुआ दोहरे हत्या कांड का पर्दाफास, कलयुगी कंस ने ही उतारा था दोनो भांजो को मौत के घाट

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इलाहाबाद : नवाबगंज के पसियापुर गांव में अनिल कुमार (18) और उसके बड़े भाई सुनील कुमार (20) की बेरहमी से हत्या उसके मामा तीरथ ने ही की थी। जांच में जुटे पुलिस अधिकारियों ने परत दर परत उधेड़ हत्याकांड से पर्दा उठा दिया। कंस रूपी मामा ने गहरी नींद में सो रहे दोनों भांजों के साथ ही अपनी बहन सुशीला पर भी वार किया था।

सुशीला को मरा जानकर वह निकल भागा था। बुधवार रात एसएसपी आकाश कुलहरि ने आरोपित तीरथ से लंबी पूछताछ की। तीरथ ने खून से सना कच्छा तलाब में फेंक दिया था। पुलिस देर रात तक कच्छे की बरामदगी में लगी रही। सोमवार को परियापुर गांव में सुशीला देवी (42) अपने घर में खून से लथपथ मिली थी। चारपाई पर सुशीला के दोनों बेटे सुनील और अनिल की लाशें पड़ी थीं।

दोहरे हत्याकांड से खलबली मच गई थी। सुशीला अस्पताल में मौत से लड़ रही है। मामले में पुलिस ने सुशीला के भाई तीरथ को हिरासत में लिया तो वह पुलिस को गुमराह करता रहा। जांच में साफ हो गया कि हत्या वाली रात तीरथ की लोकेशन उसी गांव में थी। दिल दहला देने वाले इस हत्याकांड को तीरथ ने अकेले ही अंजाम दिया था। रात साढ़े बारह बजे बजे सुशीला और उसके बेटे सो रहे थे तो तीरथ ने कुल्हाड़ी, चाकू और राड से तीनों को काट डाला था। सुशीला को भी मरा जानकर वह निकल भागा था।

पुलिस ने जब तीरथ को उठाया तो उसकी शर्ट पर खून की एक बूंद लगी मिली। क्राइम ब्रांच ने सख्ती से पूछताछ की तो तीरथ टूट गया। उसने बयान दिया कि खून से सना कच्छा उसने तलाब में फेका है। पुलिस उसे तलाश रही है। देर रात एसएसपी आकाश कुलहरि नवाबगंज थाने पहुंच गए और तीरथ से लंबी पूछताछ की। छह माह पहले भी तीरथ और सुशीला के बीच जमीन को लेकर विवाद हुआ था। अंदर ही अंदर तीरथ बहन और भांजों को कत्ल करने की योजना बना रहा था। एसएसपी आकाश कुलहरि का कहना है कि बहुत सारी बातें तीरथ ने कबूल कर लिया है।

नवाबगंज के पसियापुर गांव में हुए दोहरे कत्ल से गांव वालों का दिल दहल गया। उन्हें घटना अभी भी नहीं भूल रही है। ग्रामीणों की मानें तो सुशीला और उसका परिवार तीरथ की आंखों की किरकिरी बन चुके थे। नौकरी कर रहे अशर्फीलाल ने जब ससुराल में जमीन खरीदी तो तीरथ और सूरत ने वह जमीन खेती के लिए अपने बहनोई से मांग ली। जब अशर्फीलाल ने वहां बसने की बात की तो विवाद शुरू हो गया। मानसिक रूप से परेशान होकर अशर्फीलाल ने आत्महत्या कर ली।