वृद्धावस्था में फेफड़ों की बीमारियों का खतरा

शेयर करें:

श्वसन तंत्र हमारे शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है । फेफड़े शरीर को ऑक्सीजन पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं वहीं शरीर में मौजूद कार्बनडाइऑक्साइड को बाहर निकाल देते हैं । यदि फेफड़े कमज़ोर होने लगे तो श्वसन प्रक्रिया पर गंभीर असर होने लगता है।

बढ़ती उम्र का प्रभाव शरीर के सभी अंगों पर पड़ता है । हमारा श्वसन तंत्र भी उम्र बढ़ने के कारण प्रभावित होता है ।

बढ़ती उम्र (वृद्धावस्था) : फेफड़ों पर प्रभाव

फेफड़ों की मांसपेशियां कमज़ोर
फेफड़ों की श्वास लेने की क्षमता कम होना
व्यक्ति के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम मिलना
कमज़ोर फेफड़ों का कार्बनडाइऑक्साइड को शरीर से पूरी तरह से बाहर न निकाल पाना
इससे शरीर में कार्बनडाइऑक्साइड का स्तर बढ़ने लगता है व व्यक्ति को कई समस्या होने लगती है
श्वास नलियों में जकड़न
श्वास नलियों की सक्रियता पर असर
नलियों में जमे प्रदूषण के कणों को खांसकर बाहर निकलने की क्षमता कम होना
फेफड़ों द्वारा स्वयं को साफ़ रखने की प्रणाली पर विपरीत असर
फेफड़ों की बीमारियां का ख़तरा बढ़ जाना

धीरे-धीरे फेफड़ों की क्षमता कमज़ोर होने लगती है । व्यक्ति को श्वसन सम्बन्धी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है । व्यक्ति अत्यधिक शारीरिक श्रम वाली क्रिया नहीं कर पाता और कुछ मामलों में व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है ।

बढ़ती उम्र (वृद्धावस्था) : फेफड़ों की बीमारियों का ख़तरा

फेफड़ों में संक्रमण
निमोनिया
क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (सी ओ पी डी)

वृद्धावस्था में श्वसन सम्बन्धी संक्रमण होने की संभावना रहती है । इससे बचाव के लिए इन्फ्लुएंजा और निमोनिया का टीकाकरण ज़रूरी होता है । साथ ही बढ़ती उम्र के लोगों को श्वसन सम्बन्धी समस्याओं से बचाव के लिए सावधानी रखना और खासतौर पर प्रदूषण से बचाव करना आवश्यक है ।