लोकसभा में तीन तलाक से संबंधी विधेयक पर चर्चा जारी

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तीन तलाक पर रोक संबंधी विधेयक पर लोकसभा में चर्चा जारी, पारित होने के बाद विधेयक लेगा अध्यादेश की जगह, विपक्ष के हंगामे के कारण राज्य सभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थागित।

तीन तलाक बिल आज लोकसभा में चर्चा के लिए पेश किया गया। चर्चा की शुरूआत करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है जो न किसी जमात के खिलाफ है, न आस्था के खिलाफ और न ही किसी समूदाय के खिलाफ। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जनवरी 2017 से लेकर अब तक देशभर में 177 ट्रिपल तलाक के मामले सामने आए।

विपक्षी दलों पर सवाल उठाते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि दुनिया के 20 से अधिक इस्लामिक देशों में तीन तलाक कानून लागू है तो भारत में आपत्ति क्यों। उन्होंने कहा कि बिल पर लोगों ने जो भी आपत्तियां जताईं उसके हिसाब से सरकार ने बदलाव किए गए।

मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने और मुस्लिम समाज में एक बार में तीन तलाक यानि तलाक-ए-बिद्दत पर रोक लगाने के मकसद से लाया गया ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक’ पर आज लोकसभा में चर्चा हो रही है. विधायी कार्यसूची के तहत इस विधेयक पर पिछले गुरुवार को ही चर्चा होनी थी, लेकिन सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के आग्रह पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इसे 27 दिसंबर की कार्यसूची में शामिल करने का फैसला किया था. चर्चा से पहले बीजेपी ने लोकसभा में अपने सदस्यों को मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है.

पिछले सोमवार को लोकसभा में विधेयक पेश किया गया था, जिसमें मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से संरक्षण प्रदान करने के साथ साथ ऐसे मामलों में दंड का भी प्रावधान किया गया है.

इसके माध्यम से विवाहित मुस्लिम महिलाओं को लैंगिक न्याय और लैंगिक समानता दिए जाने के साथ ही भेदभाव रोकने और मूलभूत अधिकार प्रदान करना सुनिश्चित हो सकेगा. 2017 के विधेयक की तरह त्वरित तीन तलाक गैर जमानती रहेगा लेकिन अब संशोधन के बाद मजिस्ट्रेट से जमानत मिलने का प्रावधान होगा. विधेयक के प्रावधानों के अनुसार तीन तलाक मामले में दर्ज प्राथमिकी तभी संज्ञेय होगी, जब उसे पत्नी या उसका कोई रिश्तेदार दर्ज कराएगा. पति-पत्नी से बातचीत कर मजिस्ट्रेट मामले में समझौता करा सकता है.

लोकसभा में तीन तलाक विरोधी विधेयक पर चर्चा से पहले बृहस्पतिवार की सुबह कांग्रेस सांसदों की बैठक होगी, जिसमें इस संदर्भ में पार्टी के रुख पर निर्णय होने की संभावना है. पार्टी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि बिल पर होने वाली चर्चा में वह भाग लेगी.

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने एक बार में तीन तलाक को ‘असंवैधानिक और गैरकानूनी’ करार दिया था. इसके बाद सरकार इस पर विधेयक ले कर आई. ये विधेयक पहले लोकसभा में पारित हो गया था लेकिन राज्यसभा में यह पारित नहीं हो सका.

जब विधेयक राज्यसभा में लंबित था और तीन तलाक के मामले सामने आ रहे थे तब सरकार इस मामले में अध्यादेश लेकर आई थी. 19 सितंबर 2018 को मुस्लिम विवाह अधिकार संरक्षण अध्यादेश-2018 लागू किया गया. अब संसद का सत्र शुरू होने पर राज्यसभा में लंबित तीन तलाक संबंधित विधेयक में संशोधन कर सरकार इसे दोबारा लोकसभा में लाई है.