मध्य प्रदेश के श्मशानों और आंकड़ों में बड़ा अंतर का क्या है राज, क्या सरकार छिपा रही है कोरोना मौतें?

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भोपाल । कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर का सामना कर रहे मध्य प्रदेश में मौतों की कम संख्या एक राहत की बात रही है। हालांकि अब इस पर भी सवाल उठने लगे हैं और आधिकारिक आंकड़े और श्मशानों के आंकड़ों में एक बड़ा अंतर सामने आया है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, अभी सरकार पूरे राज्य में जितनी मौतें दिखा रही है, अकेले भोपाल में ही इससे अधिक शव जलाए और दफनाए जा रहे हैं।

क्या मौतों को छिपा रही है मध्य प्रदेश सरकार?
रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर सोमवार को शाम 6 बजे तक कोरोना संक्रमण से मरे 37 शवों का अंतिम संस्कार किया गया, वहीं पूरे शहर के लिए ये आंकड़ा 59 रहा। इसके विपरीत सरकारी आंकड़ों में सोमवार को पूरे राज्य में केवल 37 मौतें दिखाई गईं। 11 अप्रैल की भी यही स्थिति रही। इस दिन भोपाल में 68 शवों को जलाया या दफनाया गया, लेकिन सरकारी आंकड़ों में पूरे राज्य में 24 मौतें दिखाई गईं।

8, 9 और 10 अप्रैल के आंकड़ों में भी अंतर
इससे पहले के तीन दिनों में भी आधिकारिक मौतों और श्मशानों के आंकड़ों में अंतर देखने को मिलता है। 8 अप्रैल को भोपाल में 41 कोरोना मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया, जबकि सरकारी आंकड़ों में पूरे राज्य में 27 मौतें दिखाई गईं। इसी तरह 9 अप्रैल को भोपाल में 35 शवों के अंतिम संस्कार के मुकाबले सरकार ने पूरे राज्य में 23 मौतें दिखाईं। 10 अप्रैल को भोपाल में 56 शव जलाए गए, लेकिन सरकार ने 24 मौतें दिखाईं।

प्रत्यक्षदर्शी बोले- 1984 गैस त्रासदी के बाद ऐसा मंजर नहीं देखा
भदभदा विश्राम घाट पर यह स्थिति है कि लोगों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और एंबुलेंसों की लंबी लाइन लग गई है। अपने बड़े भाई का अंतिम संस्कार करने आए 54 वर्षीय बीएन पांडे ने कहा, “1984 गैस कांड के बाद पहली बार ऐसा मंजर देखने को मिल रहा है। उस वक्त मैं नवीं में पढ़ता था। मैं मात्र चार घंटे में 30-40 शव देख चुका हूं।”

“तीन-चार घंटे से बैठे, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं”
वहीं अपने बहनोई के अंतिम संस्कार के लिए आए संतोष रघुवंशी ने कहा, “हम तीन-चार घंटे से बैठे हैं। चारों तरफ लाशें जल रही हैं। हम अंतिम संस्कार नहीं कर सकते क्योंकि यहां लाशों के हिसाब से जगह नहीं है।”

श्मशान के कर्मचारी भी थकने लगे, हाथों में पड़े छाले
श्मशान घाट के कर्मचारी भी अब अत्यधिक दबाव के कारण परेशान होने लगे हैं। उनके हाथों में छाले पड़ गए हैं और कई कर्मचारियों को चोट भी लगी है। प्रदीप कनौजिया नामक एक कर्मचारी ने कहा, “मैं कमजोर महसूस कर रहा हूं, थकान हो रही है। बहुत ज्यादा शव आ रहे हैं और उनके साथ जनता भी आ रही है। भीड़ हो जाती है। पानी पी लेते हैं, लेकिन खाना खाने का समय नहीं मिलता।”

पिछले हफ्ते श्मशान में पड़ गई थी लकड़ियों की कमी
पिछले हफ्ते श्मशान में लकड़ियों की कमी भी पड़ गई थी। रईस खान नामक कर्मचारी ने बताया, “रोजाना 100-150 क्विंटल लकड़ियां काटी जा रही हैं। पिछले हफ्ते कमी हो गई थी क्योंकि रोजाना 40-45 शव आ रहे थे। लेकिन अब ठीक है।”

राज्य सरकार ने मौत छिपाने के आरोपों को किया खारिज
इस भयावह स्थिति के बावजूद सरकार ने मौतों को कम करके दिखाए जाने की बात से इनकार किया है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, “सरकार की मौतों के आंकड़ों को छिपाने की कोई मंशा नहीं है। ऐसा करके हमें कोई अवॉर्ड नहीं मिलने वाला।” बता दें कि मध्य प्रदेश में मंगलवार को 8,998 नए मामले सामने आए जो अब तक एक दिन में सबसे अधिक मामले हैं। राज्य में 3,53,632 संक्रमितों में से 4,261 की मौत हुई है।