भारत की बढ़ती क्षमता के आगे कई देशों में हताशा व्याप्त है: केशरीनाथ त्रिपाठी

शेयर करें:

इलाहाबाद। (21 अगस्त 2017) हमारे पास ज्ञान है कौशल है क्षमता है तो क्यों न हम आत्म रक्षा के क्षेत्र में निरन्तर आगे बढ़े। हमारे देश में आत्मरक्षा के क्षेत्र में जो संसाधन होने चाहिए। उसके निर्माण में हम निरंतर आगे बढ़ रहे है। परूमाणु सम्पन्न देशों की क्षेणी में सुमार हो गया है। इस देश के वैज्ञानिकों ने मिशाइल के क्षेत्र में जो प्रगति की है। वह अपने आप अद्वितीय है। उक्त आशय का विचार व्यक्त करते हुए पश्चिम बंगाल के महामहिम राज्यपाल श्री केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि- कई देशों की युद्ध दृष्टि भारत पर है किन्तु भारत की क्षमता के आगे वे हतास और निरास होने लगे है।

विज्ञान परिषद प्रयाग के सभागार में भाषा संगम के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. पी.जी. पाण्डेय जी के 41वें स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित ‘ब्रह्मॉस प्रक्षेपास्त्र की सफलता’ पुस्तक के विमोचन अवसर पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में केशरीनाथ त्रिपाठी जी ने पुस्तक के लेखक डॉ. शिवताणु पिल्लै के प्रयाशों की प्रसंशा करते हुए कहा कि श्री पिल्लै को भारत के महामहिम राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी के साथ भी कार्य करने का अवसर मिला है।

आज कलाम साहब की कमी तो देश में खलेगी ही किन्तु उनके कार्य का विस्तार कभी रूकेगा नही। हमारे आयुध संसाधनों की बढ़ती क्षमता से हमारे पड़ोसी सतर्क और भयग्रस्त भी हो गये है। हमारा देश निरंतर विभिन्न क्षेत्रों में विकास कर रहा है। यहाँ की युवा पीढ़ी में क्षमता है। समर्थ है और राष्ट्र के प्रति जो समर्पण का भाव है। वह समुचे दुनिया में अपने-आप में एक मिशाल है।

कार्यक्रम के दौरान भाषा संगम के कोषाध्यक्ष सी.एम. भार्गव जी के द्वारा स्वागत भाषण दिया गया एवं पुष्प गुच्छ के साथ मंचाशीन अतिथियों का स्वागत किया गया। संस्था की ओर से भाषा संगम के महासचिव डॉ. एम.गोविन्दराजन द्वारा सीतायण पुस्तक की प्रति भेंट की गई तथा अंग वस्त्र एवं स्मृति चिन्ह से मंचाशीन अतिथियों का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. शिवताणु पिल्लै के द्वारा अपने उद्बोधन में ‘ब्रह्मॉस प्रक्षेपात्र’ के संदर्भ में प्रकाश डाला गया।
‘ब्रह्मॉस प्रक्षेपात्र की सफलता’ पुस्तक जो कि अंग्रेजी में है उसकी हिन्दी की अनुवादिका मंजुलिका लक्ष्मी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पुस्तक की गम्भीरता और लोकप्रियता के भावना से प्रेरित होकर हमने बड़ी ही लगन के साथ अनुवाद का कार्य किया। यह मेरे लिए गौरव की बात है।

रत्तिनवेलु मैनेजिंग डायरेक्टर इन्मा इन्टर्नेशनल चेन्नै ने कहा कि भाषा संगम के माध्यम से उत्तर एवं दक्षिण की संस्कृत को जोड़ने के लिए प्रयासरत डॉ. एम.गोविन्दराजन के कार्यों की सराहना की। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री प्रदीप कुमार जी ने अपना विचार रखते हुए पुस्तक के हिन्दी संस्करण के विमोचन पर प्रसन्नता व्यक्त की तथा कहा कि यह पुस्तक की भाषा सरल हो जाने के कारण जन जन में लोकप्रिय होवेगा।

विज्ञान परिषद के प्रधानमंत्री डॉ. शिवगोपाल मिश्र जी ने यमुना के दक्षिण तट पर तमिल के संत कवि तिरुवल्लुवर मार्ग पर उनकी प्रतिमा स्थापित किये जाने की योजना पर प्रकाश डाला। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायमूर्ति श्री महेश चन्द्र त्रिपाठी जी ने कहा कि हमारे देश में आने वाली पीढी दुनिया के किसी भी मामलों में टक्कर लेने को तैयार है।

यह देश बूढ़ा नही है हमारा देश नवयुवकों की बढ़ती प्रतिभा एवं ललक के कारण आज भी जवान है। श्री त्रिपाठी ने पुस्तक के माध्यम से मिसाइल की जानकारी पर प्रशंन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस मिशाइल का अब कोई सानी नही है। इस देश ने कई मिशाइलें बनाई है। जिसमें ‘ब्रह्मॉस प्रक्षेपात्र’ सबसे तेज गति से चलने वाला मिशाइल है।

उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायमूर्ति श्री पंकज मित्तल जी ने अध्यक्षीय उद्बोधन मे ंकहा कि कलाम साहब का सपना था कि भारत दुनिया के देशों में सबसे आगे रहे। ‘ब्रह्मॉस प्रक्षेपात्र’ का निर्माण साधारण उपलब्धि नहीं है यह अद्वितीय है।

देश के तीनों सेना इस ब्रह्मॉस को महत्वपूर्ण मानती है। श्री मित्तल जी ने कहा कि पुस्तक लिखना सहज हो सकता है किन्तु उसका अनुवाद करना कठिन होता है। अनुवादक को अपने विचार रखने एवं भावनाओं को परिवर्तित करने का अधिकार नहीं रहता इसलिये पुस्तक अनुवाद का जो महत्वपूर्ण कार्य श्रीमती मंजुलिका लक्ष्मी ने किया वह सराहनीय है।

अन्त में भाषा संगम के महासचिव डॉ. एम.गोविन्दराजन ने आये हुए अतिथियों एवं गणमान्य नागरिकों का अभार व्यक्त किया एवं कार्यक्रम का संयोजन बंजरंगबली गिरि संयुक्त सचिव द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन श्री देवव्रत द्विवदी द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में विशेष रूप से इलाहाबाद संग्राहालय के निदेषक राजेश पुरोहित, विजय चित्तौरी, स्वामी सतानन्द त्यागी, पूर्व उप महापौर श्रीमती अनामिका चौधरी, आलोक चतुर्वेदी, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अनेक वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. संतोष जैन, व्रत शील शर्मा, ब्रम्हचारी श्याम शरण त्रिपाठी, भानु प्रताप सिंह, चन्द्रभानु त्रिपाठी, डॉ. राजेन्द्र मिश्रा, डॉ. राजेश कुमार मिश्रा, डॉ. संजू मिश्रा आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी प्रर्याप्त रही।