कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए ड्रॉ की घोषणा

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जून से सितंबर तक होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए मंगलवार को विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने ड्रॉ निकाला. 3,734 लोगों के आवेदन में से 1,580 यात्री इस साल इस यात्रा पर जा सकेंगे और अच्छी ख़बर है कि इस साल दो मार्ग- उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे के अलावा सिक्किम में नाथू ला दर्रे से भी यात्रा की जा रही है. ये उन यात्रियों के लिए अच्छी ख़बर है, जो पैदल ज़्यादा नहीं चल सकते.

कैलाश मानसरोवर अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के अलावा भारतीयों के लिए धार्मिक आस्था का केंद्र भी है. भगवान शिव के निवास के रूप में हिन्दुओं के लिए महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ यह जैन और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए भी धार्मिक महत्व रखता है. विदेश मंत्रालय प्रत्येक वर्ष जून से सितंबर के दौरान कैलाश यात्रा का आयोजन करता है. विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले तीर्थ यात्रियों के चुनाव के लिए मंगलवार को ड्रॉ निकाला. इस अवसर पर विदेश मंत्री ने कहा कि यह यात्रा नाथू ला दर्रे और लीपूलेख दर्रे दोनों रास्‍तों से होगी. विदेश मंत्री ने नाथू ला दर्रे से यात्रा के लिए चीन का धन्यवाद किया.

विदेश मंत्रालय ने इस बार लिपुलेख दर्रा से 60-60 यात्रियों के 18 बैच और नाथू ला दर्रा से 50-50 लोगों के 10 बैच भेजने का फैसला किया है. उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे से जहां पैदल रास्ता तय करना पड़ता है, वहीं सिक्किम में नाथू ला दर्रे का मार्ग वाहन से तय किया जा सकता है और उन यात्रियों के लिए उपयुक्त है जो पैदल नहीं चल सकते. केन्द्र सरकार की ओर से कैलाश मानसरोवर के यात्रियों की सुविधा के लिए पूरे इंतज़ाम किए गए हैं.

दरअसल डोकलाम में पैदा हुए गतिरोध के कारण नाथू ला मार्ग से कैलाश मानसरोवर की यात्रा रोक दी गई थी. लेकिन पिछले दिनों भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने चीन के विदेश मंत्री से बातचीत की और उसके बाद चीन ने सिक्किम में नाथू ला दर्रा से कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने पर सहमति जता दी. कैलाश मानसरोवर की यात्रा अपने धार्मिक मूल्यों और सांस्कृतिक महत्व के कारण जानी जाती है. हर साल सैकड़ों यात्री इस तीर्थ यात्रा पर जाते हैं.