प्रयागराज के फाफामऊ घाट पर गंगा की रेत बही तो द‍िखने लगे हजारों दफन शव कुत्ते लगे मंडराने, आनन-फानन में फिर डाली गई मिट्टी

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प्रयागराज। कोरोना की वजह से हजारों जान चली गई. सरकारी आंकड़े कुछ भी बताएं, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही है. अकेले प्रयागराज के फाफामऊ घाट पर ही गंगा की रेत में हजारों डेड बॉडीयों को दफना दिया गया है. जिनमें से वह लोग ज्यादा है. जिनके पास अंतिम संस्कार के पैसे नहीं थे. बुधवार को हुई सुबह जमजम बारिश में रेत काफी बह गई. जिससे फाफामऊ कछार में दफनाए गए शव दिखाई देने लगे. शवों को आसपास कुत्ते भी मंडराने लगे. जिस की जानकारी होने पर नगर निगम की टीम पहुंची और सभी शवों को बालू से ढक दिया गया.

गौरतलब है कि फाफामऊ श्मशान घाट पर तैनात एसडीआरएफ के जवानों ने बुधवार सुबह 11:00 बजे झुंड में घूमते कुत्ते देखें तभी जवान पास में गए, तो देखा दफनाए गई शवों के ऊपर जो बालू दबी हुई थी. वह बारिश में बह गई है. कुत्ते शवों को नोचने की कोशिश कर रहे थे. बालू बहने से लगभग आधा दर्जन शवों का हिस्सा दिखाई देने लगा था. जवानों ने तुरंत नगर निगम निगरानी समिति के सदस्य कमलेश तिवारी को सूचना दी. कमलेश तिवारी मौके पर पहुंच गए और नगर निगम के जोनल अधिकारी रविंद्र कुमार से शवों को ढकने के लिए टीम भेजने को कहा.

तकरीबन दोपहर 12:00 बजे नगर निगम के जोनल अधिकारी सफाई इंस्पेक्टर 30 सफाई मजदूरों के साथ कछार में पहुंचे और बालू से शवों को ढकना शुरू कर दिया. 1 घंटे में सभी शव बालू में ढक दिए गए. हालांकि अब सरकार ने कोरोना से हुई मौत का अंतिम संस्कार नि:शुल्क करा दिया है और शमशान घाट पर पुलिस चौकी बनी है, ताकि बॉडी को कोई दफन न करे. इसलिए पुलिस भी निगरानी करती है, लेकिन गंगा का कछार इतना फैला हुआ है कि अब भी बॉडी को अलग अलग जगहों पर दफन किया जा रहा है.