फुटबाल की किक से दुनिया नाप रहीं यहाँ की बेटियां

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भिवानी का अलखपुरा गांव की बेटियां अपने बेहतरीन फुटबॉल खेल के लिए पूरे देश की बेटियों के लिए मिसाल हैं। इस गांव के हर घर से लड़कियां फुटबॉल खेलने के लिए स्टेडियम में रोज़ाना मेहनत करती हैं। जिसके दम पर वे अपने देश का नाम रोशन करने की तमन्ना दिल में संजोए हुए है।

जज्‍बा, जुनून और संघर्ष क्‍या होता है, यह देखना हो तो हरियाणा के भिवानी जिले के छोटे से गांव अलखपुरा आ जाइये। इस गांव की बेटियां तमाम अभावों और परेशानियों के बावजूद आसमान की ऊंचाइयों को छू रही हैं और फुटबॉल के किक से दुनिया नाप रही हैं। वास्‍तव में अलखपुरा महिला फुटबाल की नर्सरी बन चुका है। गांव के मैदानों में लड़कियां सुबह हो या शाम फुटबॉल खेलतीं नजर आ जाएंगी।

संजू यादव, पूनम शर्मा और समीक्षा जाखड़ जैसी बेटियों ने फुटबॉल के खेल में पूरे देश में परचम लहराया है। इनमें अधिकतर ने मजदूरी और खेतों में काम कर बुलंदियों को छुआ है। अलखपुरा प्रदेश के अन्य गांवों जैसा ही है। लेकिन, इस गांव को अलग करती है, फुटबाल की अलख जगातीं यहां की बेटियां। तीसरा पहर होते-होते सैकड़ों लड़कियां स्कूल के मैदान पर पहुंच जाती हैं। इनके पास चैंपियनों जैसे महंगे जूते और किट भले ही न हो पर जज्बा चैंपियनों जैसा है। यही कारण है कि एक के बाद एक कामयाबी उनके कदमों को चूमती है।

बेटियों ने फुटबॉल के क्षेत्र में विभिन्न प्रतियोगिताए जीतने के साथ साथ ही भारतीय र्राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह बनाई है। और अब गांव की उभरती खिलाड़ियों के लिए ग्रामीणों ने अनुठी पहल की शुरूआत की है । गांव में 27 से 30 दिसम्बर तक बेबी लीग का आयोजन किया जा रहा है। भिवानी के अलखपुरा गांव में लड़कियों में फुटबॉल क्रेज को देखते हुए हरियाणा सरकार ने यहां पांच करोड़ की लागत से फुटबॉल एस्ट्रोटेफ बनाने का निर्णय लिया है, कहना ग़लत नहीं होगा कि यहां लड़कियां की दुनिया गोल है, फुटबॉल है।