आस्था के नाम पर हनुमान ताल का ये है हाल, जबलपुर के 52 तालाबों के नाम यहाँ देखे

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जबलपुर। आस्था के नाम पर जहाँ एक और नदियाँ प्रदूषित हो रही है वहीं दूसरी और जबलपुर के हनुमान ताल का भी ऐसा ही कुछ हाल है. बीच शहर में हनुमान ताल तालाब हैं जिनसे लोगों की आस्था जुड़ी हुई है. शहर में मनाए जाने वाले अधिकांश त्योहारों पर लोग यहां पूजा के अवशेषों को डाल दिया जाता है. आस्था के नाम पर लोगों को यह तरीका अब इन नदी-तालाबों के आस्तित्व को खतरें में डाल रहा है.

इस तालाब के किनारे मंदिर, मस्जिद और जैन धर्म के लोगों के तीर्थ स्थल भी हैं. सभी धर्मों के लोग किसी न किसी त्योहार के लिए हनुमान ताल से जुड़े हुए हैं और इसी वजह से इसे शुद्ध और पवित्र माना जाता है। लोग घरों में होने वाली पूजा-पाठ की सामाग्री इसी तालाब में डालकर चले जाते हैं. लोगों के द्वारा गंदगी फैलान के कारण ये कचरा और गंदगी तालाब की तली पर बैठ जाती है, वहीं बहुत सारा कचरा ऊपर ही तैरता रहता है. करीब 15 एकड़ का यह तालाब चारों तरफ से पक्का है. समय-समय पर इसके घाट बनाए गए हैं.

कभी सुंदरता का पर्याय रहा जबलपुर का हनुमान ताल अब गंदगी की भेंट चढ़ता जा रहा है. लोगों ने इसे अब कचरा घर बना लिया है. सदियों पुराने जबलपुर के हनुमान ताल में अब चारों ओर सिर्फ कचरा ही कचरा देखने को मिलता है. पानी का यह स्रोत सदियों से इलाके के लोगों को साफ और स्वच्छ पानी देता रहा है. लेकिन ये गन्दगी देखकर तो बीमारी फैलने की आशंका बढ़ जा रही है।

नगर निगम भी ध्यान नहीं देता इसलिए सदियों पुराना यह तालाब गंदे पानी का पोखर बन गया है. शहर में 52 तालाब, जिनके संरक्षण और रखरखाव के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किया जा रहे हैं, कुछ चुनिंदा तालाबों को सुंदर बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, बाकी शहर के कई तालाब धीरे-धीरे गंदगी की भेंट चढ़ते जा रहे हैं जिनमे से एक आपको हनुमान ताल देखने को मिलेगा।

वहीं, जबलपुर में तालाब और तलैया की बात करें तो जबलपुर में 52 तालाब और 84 तलैया थीं, जो अब महज 32 बचे हुए हैं, भू-माफिया और शहरीकरण की दौड़ में ये तालाब खत्म हो गए हैं, लेकिन इन तालाबों के नाम आज भी जिन्दा हैं, कॉलोनियों को इन तालाबों के नाम से जाना जाता है.

जबलपुर के 52 तालाबों के नाम :- 

गोंड शासकों की तालाब और बावड़ी बनवाने में विशेष रूचि थी। उनके समय में अनगिनत तालाब और बावड़ियाँ खुदवायी गईं। इन तालाबों के निर्माण का प्रयोजन सिंचाई की सुविधा और सूखा पड़ने पर जल उपलब्ध कराना था। जबलपुर में ‘जनश्रुति’ के अनुसार लगभग 52 तालाब थे, जिनमें से अधिकतर अब अस्तित्व में नहीं हैं और उनके ऊपर आवासीय इमारतें बन गई हैं। विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 52 तालाबों की सूची इस प्रकार है :-

1. हनुमान ताल– आधे से ज्यादा तालाब पर अब हनुमान ताल नाम का मोहल्ला बस चुका है।

2. भंवरताल– यहाँ नगर निगम द्वारा अब सुंदर पार्क बना दिया गया है।

3. महानद्दा– अब केवल दल-दल से भरा यह तालाब अवशेष मात्र है।

4. रानी ताल– रानी दुर्गावती ने बनवाया था। यहाँ अब रानीताल स्टेडियम और आवासीय परिसर बन चुके हैं।

5. चेरी ताल– रानी दुर्गावती की दासी रामचेरी के नाम पर बनवाया गया था। अब यहाँ चेरी ताल मोहल्ला है।

6. संग्राम सागर– गौंड नरेश संग्राम शाह ने बनवाया था। इसके किनारे ऊँची पहाड़ी पर तान्त्रिक स्थान बाजना मठ है। अब यह छोटी तलैया के आकार का है।

7. फूटा ताल– यहाँ अब ‘फूटा ताल’ नाम की बस्ती है।

8. गुलौआ– यह तालाब गौतमजी की मढ़िया के पास है।

9. सूपा ताल– बजरंग मठ से लगा हुआ, मेडिकल कॉलेज मार्ग पर, यहाँ अभी भी लोग मछलियाँ पकड़कर अपनी आजीविका चलाते हैं।

10. देव ताल– गौंड शासन काल में इसका नाम विष्णुताल है। तालाब के चारों ओर मन्दिर बने हैं।

11. कोला ताल– देव ताल की पीछे की पहाड़ियों में स्थित है।

12. गंगा सागर– गौंड नरेश हृदयशाह ने इसे बनवाया था।

13. ठाकुर ताल– यह रानी दुर्गावती के अमात्य दरभंगा निवासी महेश ठाकुर के नाम पर है।

14. तिरहुतिया ताल– रानी दुर्गावती के अमात्य महेश ठाकुर और उनके भाई दामोदर ठाकुर की स्मृति में है। यह दोनों भाई उत्तर बिहार के तिरहुत जिले से यहाँ आये थे। इसलिए इसे तिरहुतिया ताल नाम दिया गया।

15. आधार ताल– रानी दुर्गावती के मन्त्री श्री आधारसिंह कायस्थ की स्मृति में बनवाया गया था।

16. हाथी ताल– इसी तालाब को पूरकर हाथी ताल कॉलोनी बसायी गई है।

17. बाबा ताल– हाथी ताल श्मशान के पास।

18. मढ़ा ताल– यह शहर के मध्य में है, जहाँ आजकल सारे व्यापारिक संस्थान, शिक्षण संस्थान और सरकारी कार्यालय हैं।

19. गुड़हा ताल– गंगा सागर के पास।

20. अवस्थी ताल– यह हितकारिणी सभा के सदस्य स्वर्गीय सरजूप्रसाद अवस्थी से संबद्ध है।

21. बैनीसिंह की तलैया– बैनीसिंह के नाम पर यह तलैया बनाई गई है। अंग्रेजी शासन काल के पहले बैनीसिंह का इस क्षेत्र में दबदबा था।

22. सुरजला– गढ़ा जाने के लिये जो रास्ता शाही नाका होकर जाता था, उसके अन्तिम छोर पर यह तालाब स्थित है।

23. अलफखां की तलैया/ ‘तिलक भूमि तलैया’– 19वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में अफलखां के नाम पर बनाई गई थी। बालगंगाधर तिलक के जबलपुर आगमन पर यहाँ उनकी आमसभा हुई थी, तब से इसी के नाम से भी जानते हैं।

24. सेवाराम की तलैया– जैसलमेर से आकर राजा गोकुलदास ने यहाँ आकर व्यापारिक गतिविधियाँ की थीं। उन्होंने अपने दादा ‘सेवाराम’ के नाम पर वह तलैया बनवाई थी।

25. कदम तलैया– यह गुंरदी बाजार के पास स्थित थी। 1935-36 के आस-पास इसी तलैया पर जहूर थियेटर बनाया गया।

26. मुड़चरहाई– यह गोल बाजार के पीछे थी, यहाँ आजकल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का हॉल और महिला उत्कर्ष मंडल है।

27. माढो ताल– आई.टी.आई. के पास माढो ताल नाम के गाँव में यह स्थित है।

28. सांई तलैया– गढ़ा रेलवे केबिन नं.-2 के पास यह स्थित है।

29. मान तलैया
30. श्रीनाथ की तलैया-

31. नौआ तलैया– गौतमजी की मढ़िया से गढ़ा बाजार को जाने वाले मार्ग पर स्थित है।

32. सूरज तलैया– त्रिपुर चौक के बगल में।

33. फूलहारी तलैया– इस पर पक्का तटबंध बना है। यह शाही नाके से थोड़ा आगे स्थित है।

34. जिन्दल तलैया– गढ़ा के पुराने थाने से श्रीकृष्ण मंदिर को जाने वाले मार्ग पर है।

35. मछरहाई– शाही नाका के समीप।

36. बघा– गढ़ा हितकारिणी स्कूल के पीछे।

37. बसा- गढ़ा, भूलन रेलवे चौकी के पास।

38. बाल सागर– मेडिकल कॉलेज के पीछे।

39. बल सागर– ग्राम तेवर में है।

40. हिनौता ताल– आभाहिनौता गाँव में है।

41. सगड़ा ताल– मेडिकल कॉलेज के पास।

42. चौकी ताल– लम्हेटा घाट रोड पर।

43. सूखा ताल– जबलपुर-पाटन मार्ग पर सूखा ग्राम में, शिल्प की दृष्टि से यह महत्त्वपूर्ण है। इसके चारों ओर पक्के तटबंध बने हैं।

44. महाराज सागर– देव ताल के पास रजनीश धाम के समीप।

45. कूड़न ताल– भेड़ाघाट रोड पर कूड़न गाँव में।

46. अमखेरा ताल- आधार ताल के पीछे अमखेरा गाँव में।

47. ककटैया तलैया– गोरखपुर छोटी लाइन के पास।

48. खम्ब ताल– सदर में।

49. गणेश लाल– एम.पी.ई.बी. गणेश मंदिर के पीछे।

50. कटरा ताल– यह पूरा सूख गया है।

51. जूड़ी तलैया