गंगा का जलस्तर बढ़ने से बनारस और आसपास के लोगों में चिंता

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प्रयागराज। उत्तरप्रदेश में स्थित संगम नगरी प्रयागराज में एक बार फिर से गंगा का जलस्तर बढ़ने की खबर आ रही है. इसके साथ ही बनारस और आसपास के जिलों में लोगों की चिंता फिर बढ़ने लगी है. बुधवार को लोगों ने जब वाराणसी में जलस्तर की स्थिति जानने के लिए केंद्रीय जल आयोग के कार्यालय के टेलीफोन नंबर 2280339 पर संपर्क किया तो उधर से आवाज आई कि ‘डायल किया गया नंबर बिल भुगतान न होने के कारण बंद है.’

ऐसे में जब बाढ़ का खतरा पूरी तरह टला नहीं है. इस बारे में विभागीय सूत्रों से संपर्क किया गया तो पता चला कि उक्त लैंड लाइन नंबर एक सप्ताह से अधिक समय से बंद है. इस बारे में उच्चाधिकारियों को जानकारी दे दी गई है. वहीं, काशी में गंगा बुधवार को दोपहर बाद मंद गति से बढ़ रही हैं. प्रयागराज में मंगलवार की सुबह आठ से बुधवार की सुबह आठ बजे तक 24 घंटे में 44 सेमी जलस्तर बढ़ा. बीते 24 घंटों में काशी में गंगा का जलस्तर 63.76 मीटर से 13 सेमी कम होकर 63.63 मी. तक पहुंचा था.

संगम के घाटियों ने अपने सामान समेटकर उन्हें अब पीछे करना शुरू कर दिया है. उत्तराखंड और मध्य प्रदेश की बारिश का पानी यहां पहुंचकर लोगों को मुसीबत में डाल सकता है. प्रयागराज में जब गंगा और यमुना दोनों नदियां खतरे के निशान को पार करती हैं तो शहर के तकरीबन एक चौथाई इलाके में बाढ़ का पानी घुसकर आबादी को प्रभावित करने लगता है.

कोरोना की महामारी के चलते बाढ़ से बचाव के मद्देनज़र इस बार सरकारी इंतजाम अभी तक फीके नज़र आ रहे हैं. प्रशासन ने न तो अभी बाढ़ राहत चौकियां बनाई हैं और न ही राहत केंद्रों के बारे में एलान किया है. हालांकि नदियों के तट पर रहने वाले लोगों ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. पानी बढ़ने पर सबसे ज़्यादा दिक्कत संगम आने वाले श्रद्धालुओं को होती है. चार दिन पहले प्रयागराज आए सूबे के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने जिले के अफसरों को बाढ़ से निपटने के पुख्ता इंतजाम किये जाने को कहा था.