सामुदायिक भागीदारी ने बदली मेघायल के उम्पाथॉ गांव की तस्वीर

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मेघालय के उम्पाथॉ गांव के लोगों के कड़े और सार्थक प्रयास के कारण गांव की रूप-रेखा बदल चुकी है और इस काया कल्प क लिए गांलव वालों ने विशेष मुहिम चलाई है जिसमें निजी क्षेत्र के बैंक औऱ स्वयं सेवी संस्था ने ग्रामीणों का साथ दिया ये कहानी मेघालय की राजधानी शिलांग से लगभग 85 किमी दूर उम्पाथॉ गांव से हैं जहां ग्रामीणों ने कुछ ही समय में आपसी सहयोग और भागीदारी से गांव का काया कल्प कर दिया कहते हैं कि तकदीर भी उन्हीं का साथ देती है जो खुद अपने लिए रास्ता बनाते हैं।

गांववालों की इस मुहिम में एक स्वयं सेवी संस्था और निजी क्षेत्र के एक बैंक ने बखूबी साथ दिया गांव वालों की इच्छाशक्ति और जिजीविषा को देखकर बैंक ने इसे अपने सम्पूर्ण ग्रामीण विकास कार्यक्रम में शामिल कर गांव के विकास में फंड्स की कमी को आड़े नहीं आने दिया। बस इसके बाद ग्रामीणों की बनाई योजनाएं परवान चढ़ीं और देखते ही देखते उम्पाथॉ एक मॉडल गांव के रूप में उभर कर आया।

आज़ादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि 550 लोगों की आबादी वाले इस गांव के हर घर में पीने का साफ पानी पाइपलाइन के ज़रिए पहुंच रहा है, जबकि पहले ग्रामीणों को पहाड़ी झरनों से पानी भर कर लाना पड़ता था। गांव में स्वच्छ शौचालय बनाए गए हैं और सड़कों की हालत को भी सुधारा गया है।

गांव के लोग इस बदलाव के वाहक बने हैं और ऐसे में बेहतर व्यवस्था को कायम रखने में सभी लोग सहयोग कर रहे है।उम्पाथॉ अब एक नज़ीर बन चुका है, सामुदायिक भागीदारी के ज़रिए विकास की नई परिभाषा गढ़ने के लिए।