बाल विवाह कानूनन अपराध होगी सख्त कार्यवाही

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अनुपपुर @ जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी मंजूषा शर्मा ने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम में दड प्रावधान के अंतर्गत बालिका की आयु 18 वर्ष और बालक की आयु 21 वर्ष से कम नहीं होना चाहिये। अधिनियम अनुसार ऐसे विवाह में शामिल प्रत्येक व्यक्ति सजा का भागीदार होता है चाहे वह विवाह में सेवा देने वाले सेवा प्रदाता ही क्यों न हों। बाल विवाह कराने पर 2 वर्ष की सजा व 1 लाख तक का जुर्माना या इससे भी अधिक हो सकता है।इस अधिनियम से संबंधित प्रकार की सुनवाई के लिये जिला न्यायालय सक्षम न्यायालय है तथा बाल विवाह किये जाने पर 2 वर्ष के कारावास, एक लाख रूपये का जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है।

बाल विवाह रोकना एवं इसे हतोत्साहित करना हर समझदार और कानूनप्रिय व्यक्ति की जिम्मेदारी है। शर्मा ने कहा कि बाल विवाह रोकना एवं इसे हतोत्साहित करना हर समझदार और कानूनप्रिय व्यक्ति की जिम्मेदारी है, इसलिये यह अवश्य सोचें कि कहीं आप 18 वर्ष से कम उम्र की लाडली बिटिया का विवाह करके उसकी जिदंगी अनजाने जोखिम में डालने तो नहीं जा रहे हैं। साथ ही आपने अक्ष्य तृतीया और विशेष तिथियों के दौरान बाल विवाह की रोकथाम के लिये जिले के सामूहिक विवाह कराने वाले आयोजकों, सभी धर्मगुरू, समाज के मुखिया, हलवाई, केटरर, बैंडवाला, घोड़ीवाला, ट्रांसपोर्ट, प्रिंटिंग प्रेस के प्रबंधक, ब्यूटी पार्लर, संचालक मंगल भवन और अन्य संबंधितों से अनुरोध किया है कि वे किसी विवाह या समारोह में शामिल होने से पहले यह अवश्य देख लें कि कहीं वो बाल विवाह तो नहीं है। यदि बाल विवाह हो तो इसे रोकने में शासन को सहयोग प्रदान करें। उन्होंने सभी विभागों को भी इस संबंध में आवश्यक सहयोग प्रदान करने का अनुरोध किया है।