कुपोषण के खिलाफ केंद्र की जंग

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कुपोषण के खिलाफ जंग के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है..सरकार ने तय किया है कि राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत इस समस्या से लड़ रहे विभिन्न पक्षों को मिलकर काम करें इसके लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल जाएगा और कुपोषण के खिलाफ चल रही जंग जन आंदोलन बने इसके लिए दिशा निर्देश भी जारी किए गये हैं ताकि केंद्र, राज्य, ज़िला और ब्लॉक स्तर तक वास्तविक समय निगरानी के साथ सभी की ज़िम्मेदारी तय की जा सके. इन कोशिशों को और गति देने के लिए सितंबर को पोषण महीने के तौर पर मनाया जाएगा।

महिला और बाल विकास मंत्रालय ने प्रधानमंत्री की समग्र पोषण की अति महत्‍वपूर्ण योजना पोषण अभियान को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी साझेदारी विषय पर ‘टेक-थॉन’ नामक एक दिवसीय संगोष्‍ठी आयोजित की। विभिन्न पक्षों के बीच सहयोग और प्रौद्योगिकी का उपयोग पोषण अभियान के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। कारगर निगरानी और समय पर कार्रवाई के लिए आईसीडीएस-सीएएस (कॉमन एप्‍लीकेशन सॉफ्टवेयर) विशेष रूप से डिजाइन किया गया सॉफ्टवेयर है.. जो सेवा डिलीवरी को मजबूत बनाने तथा पोषण परिणामों को सुधारने में मदद करेगा

इससे पहले कभी देश में पोषण को इतना महत्‍व नहीं दिया गया…अब यह विश्‍व में सबसे बड़ा ई-पोषण तथा स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम है जिसमें अभी विभिन्न चरणों में 550 जिले शामिल किए गए हैं  2019-20 तक सभी 36 राज्‍यों/केंद्रशासित प्रदेश और 718 जिले शामिल किए जाएंगे 14 लाख आंगनवाड़ियों में करीब 10 करोड़ लाभार्थियों को फायदा होगा भारत में 35.7 % 5 साल के बच्चे कम वज़न के हैं तो 38.4 % बच्चों में अवरुद्ध विकास के लक्षण हैं गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं और बच्चों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के अलावा सरकार ने पोषण मानकों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का गठन भी किया है जिसमे कुपोषण, अवरुद्ध विकास, अनिमिया और जन्म के समय कम वज़न को लेकर समय अवधि के अनुसार लक्ष्य निर्धारित किए गये हैं.

प्रधानमंत्री ने 8 मार्च, 2018 को झूंझुनू, राजस्थान में पोषण अभियान को लांच किया था। अब कुपोषण के खिलाफ जंग में सफलता के लिए तकनीक का साथ इसे और कारगर बना रहा है..