नागरिकता संशोधन विधेयक को मिली कैबिनेट की मंजूरी

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केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूर हुआ नागरिकता संशोधन विधेयक, संस्कृत यूनिवर्सिटी और पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन समेत कई अहम विधेयकों मिली मंजूरी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अध्यक्षता में दिल्ली में मंत्रिमंडल की बैठक हुई. बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। कैबिनेट ने नागरिकता संशोधन बिल को मंज़ूरी दे दी है। अब इस बिल को लोकसभा में पेश किया जाएगा।

बिल में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से भारत आए अप्रवासियों को नागरिकता देने का प्रावधान है बशर्ते कि वो उन देशों के बहुसंख्यक यानी मुस्लिम समुदाय से नहीं हों। बिल का फ़ायदा इन देशों से भारत आए वहां के अल्पसंख्यक समुदाय के हिन्दू , सिख , बौद्ध , जैन , ईसाई और पारसी समुदाय के लोगों को मिलेगा।

इससे पहले नागरिकता संशोधन बिल 19 जुलाई 2016 में लोकसभा में पेश किया गया था। बिल को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा गया और इसकी रिपोर्ट आने के बाद बिल को इसी साल 8 जनवरी को लोकसभा ने पारित कर दिया। हालांकि बिल राज्यसभा में नहीं जा सका और लोकसभा का कार्यकाल ख़त्म होने से बिल भी ख़त्म हो गया था।

कैबिनेट ने संसद में एससी-एसटी प्रतिनिधित्व को 10 साल बढ़ाने की मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कैबिनेट मीटिंग के बारे में बताया कि एससी-एसटी रिजर्वेशन को 10 साल और बढ़ाते हुए 2030 तक कर दिया गया है। इसकी मियाद 25 जनवरी, 2020 को समाप्त हो रही थी.

जम्मू कश्मीर आरक्षण (दूसरे संशोधन विधेयक )2019 को निरस्त करने की कैबिनेट की हरी झंडी मिल गई है। कैबिनेट की बैठक में लेबर कोड से जुड़े चौथे कानून को मंजूरी दी गई। इस विधेयक को इसी सत्र में संसद में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि कैबिनेट से भारत बॉन्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड को स्वीकृति मिल गई है. 3 डीम्ड यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी में बदलने से संबंधित बिल को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी।