पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से दिल्ली में प्रदूषण का स्तर ”गंभीर” श्रेणी में पहुंचा

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पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से समस्या बढ़ी है, इस कारण लोगों को सांस लेने में भी भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इश समस्सया से निपटने के लिए सरकार की ओर से प्रयास तेज़ किए गए हैं।

दिल्लीवासियों का शहर में सांस लेना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। दीपावली से दो दिन पहले दिल्ली की हवा की गुणवत्ता सोमवार को इस मौसम में सबसे खराब दर्ज की गई। हवा की दिशा में बदलाव और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने के कारण प्रदूषण का स्तर तय सीमा से आठ गुना अधिक पर पहुंच गया। यह स्तर ‘अत्यंत गंभीर से भी अधिक’ की श्रेणी में है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि त्योहार के दौरान स्थानीय कारकों के कारण हवा की गुणवत्ता और खराब हो सकती है। इस बीच केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कल विभिन्न तेल कंपनियों से अपने पेट्रोल पंपों पर प्रदूषण-रोधी उपकरण नहीं लगाने पर स्पष्टीकरण मांगा है। प्रदूषण से निपटने के उपाय के क्रियान्वयन की जांच के लिए सी पी सी बी ने दिल्ली-एनसीआर में टीमों को तैनात किया है।

सूचकांक शून्य से 50 तक होने पर हवा को ‘अच्छा’, 51 से 100 होने पर ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘सामान्य’, 201 से 300 से ‘खराब’, 301 से 400 तक ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच को ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा जाता है।

सरकार की ओर से प्रदूषण से निपटने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं जिसमें निर्माण गतिविधियां रोकने और यातायात का नियमन करना शामिल है । खुदाई समेत सभी निर्माण गतिविधियों पर रोक है। दिल्ली तथा एनसीआर के अन्य जिलों में सिविल निर्माण गतिविधियां रोक दी गई हैं।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को वाहनों की प्रदूषण जांच को तेज करने तथा 1 से 10 नवंबर के दौरान क्षेत्र में यातायात की भीड़ को नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं। एक से 10 नवंबर तक ‘स्वच्छ हवा अभियान’ भी शुरू किया गया है ताकि प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जाए और उनकी रिपोर्ट की जाए।