ब्रिटिश नेवल इंजीनियर ने गैरतपुर गांव में जगाई शिक्षा की अलख

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मार्टिन होवार्ड 1984 में एक ब्रिटिश एयरोनॉटिकल इंजीनियर के रूप में अटैचमेंट पर भारत आये उन्हें महसूस हुआ की भारत की ग्रामीण जनता जो अच्छी शिक्षा से वंचित रह जाती है उन्हें भी अच्छी शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है और उन्हें लगा की उन्हें गरीबों को शिक्षित करने पर ध्यान देना चाहिए और बस इसी ध्येय के साथ वो इस छोटे से गांव गैरतपुर बॉस में बस गए

आज मार्टिन और उनके सहयोगी कर्नल वी . के वर्मा यहाँ बहुत कम फीस में गांव के बच्चों को उम्दा से उम्दा शिक्षा प्रदान कर रहे हैं और इन बच्चों के अभिभावक भी इनके कृतज्ञ हैं I

इस स्कूल में बच्चों पर इम्तेहान का बोझ नहीं डाला जाता बल्कि मोंटेसरी शिक्षा पद्दति के अंतर्गत बच्चों को आज़ादी दी जाती है प्रयोगात्मक ढंग से शिक्षा प्राप्त करने की

गैर भारतीय होते हुए भी मार्टिन ने भारत के इन नौनिहालों के भविष्य को सजाने और सँवारने का जो बीड़ा उठाया है उससे हम सब को सीख लेने की ज़रुरत है I